चाणक्य से जब ये पूछा गया कि आप भी तो योग्य हैं , फिर चंद्रगुप्त को राजा क्यों बनाना चाहते हैं ।
चाणक्य ने कहा - राजा सामाजिक जीवन जीने वाला , पत्नी , पुत्र व पुत्रियों से सम्पन्न , समृद्धशाली व्यक्ति ही होना चाहिये,
जिससे वो हर रिश्ते के दुःख को समझ सके और तदनुरूप जनता से व्यवहार कर सके ।
इसलिए मैं सन्यासी होने के कारण इस पद हेतु सर्वदा अनुचित हूं।
(अर्थशास्त्र - छठा अध्याय )
चाणक्य ने कहा - राजा सामाजिक जीवन जीने वाला , पत्नी , पुत्र व पुत्रियों से सम्पन्न , समृद्धशाली व्यक्ति ही होना चाहिये,
जिससे वो हर रिश्ते के दुःख को समझ सके और तदनुरूप जनता से व्यवहार कर सके ।
इसलिए मैं सन्यासी होने के कारण इस पद हेतु सर्वदा अनुचित हूं।
(अर्थशास्त्र - छठा अध्याय )


