चाणक्य

चाणक्य से जब ये पूछा गया कि आप भी तो योग्य हैं , फिर चंद्रगुप्त को राजा क्यों बनाना चाहते हैं ।
चाणक्य ने कहा - राजा सामाजिक जीवन जीने वाला , पत्नी , पुत्र व पुत्रियों से सम्पन्न , समृद्धशाली व्यक्ति ही होना चाहिये,
जिससे वो हर रिश्ते के दुःख को समझ सके और तदनुरूप जनता से व्यवहार कर सके ।
इसलिए मैं सन्यासी होने के कारण इस पद हेतु सर्वदा अनुचित हूं।

(अर्थशास्त्र - छठा अध्याय )

गणपति बापा

।।गणपति बापा मोरया।।
रिद्धि दे, सिद्धि दे,
वंश में वृद्धि दे, ह्रदय में ज्ञान दे,
चित्त में ध्यान दे, अभय वरदान दे,
दुःख को दूर कर, सुख भरपूर कर, आशा को संपूर्ण कर,
सज्जन जो हित दे, कुटुंब में प्रीत दे,
जग में जीत दे, माया दे, साया दे, और निरोगी काया दे,
मान-सम्मान दे, सुख समृद्धि और ज्ञान दे,
शान्ति दे, शक्ति दे, भक्ति भरपूर दें।

श्री रामचरितमानस की 8 दिव्य चौपाइयां

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