ले मशाले चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के
अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के।
पूछती है झोपड़ी और पूछते है खेत भी।
कब तलक लूटते रहेंगे लोग मेरे गाँव के।
बिन लड़े कुछ भी नही मिलता यहा ये जानकर।
अब लड़ाई लड़ रहे हैं लोग मेरे गाँव के।
चीखती है हर रुकावट ठोकरों की मार से।
बेड़िया खनका रहे हैं लोग मेरे गाँव के।
लाल सूरज अब उगेगा देश के हर गांव में।
अब इकटठे हो चले हैं लोग मेरे गाँव के।
देख यारा जो सुबह लगती हैं फीकी आजकल।
लाल रंग उसमे भरेंगे लोग मेरे गाँव के।
अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के।
पूछती है झोपड़ी और पूछते है खेत भी।
कब तलक लूटते रहेंगे लोग मेरे गाँव के।
बिन लड़े कुछ भी नही मिलता यहा ये जानकर।
अब लड़ाई लड़ रहे हैं लोग मेरे गाँव के।
चीखती है हर रुकावट ठोकरों की मार से।
बेड़िया खनका रहे हैं लोग मेरे गाँव के।
लाल सूरज अब उगेगा देश के हर गांव में।
अब इकटठे हो चले हैं लोग मेरे गाँव के।
देख यारा जो सुबह लगती हैं फीकी आजकल।
लाल रंग उसमे भरेंगे लोग मेरे गाँव के।

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