संगठन की शक्ति बड़े-बड़ों को धूल चटा देती है । क्योंकि....
संगठन में - कायदा नहीं, व्यवस्था होती है।
संगठन में - सूचना नहीं, समझ होती है।
संगठन में - क़ानून नहीं,अनुशासन होता है।
संगठन में - भय नहीं, भरोसा होता है।
संगठन में - शोषण नहीं, पोषण होता है।
संगठन में - आग्रह नहीं, आदर होता है।
संगठन में - संपर्क नहीं, सम्बन्ध होता है।
संगठन में - अर्पण नहीं, समर्पण होता है।
संगठन में - "मैं" नही "हम" होता है।
संगठन में- "आत्मप्रशंसा" नहीं "सर्व सम्मान” होता है।
इसलिए स्वयं को संगठन से जोड़े रखें ।
संगठन सामूहिक हित के लिए होता है, व्यक्तिगत "स्पर्धा" और "स्वार्थ" के लिए नही ।
प्रशंसा सबकी करो निंदा किसी की नहीं ।
व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा वाला पदाधिकारी संगठन में कभी भी सर्वप्रिय नहीं हो सकता ।
सबसे स्नेह, सबका सम्मान ।
संगठन में - कायदा नहीं, व्यवस्था होती है।
संगठन में - सूचना नहीं, समझ होती है।
संगठन में - क़ानून नहीं,अनुशासन होता है।
संगठन में - भय नहीं, भरोसा होता है।
संगठन में - शोषण नहीं, पोषण होता है।
संगठन में - आग्रह नहीं, आदर होता है।
संगठन में - संपर्क नहीं, सम्बन्ध होता है।
संगठन में - अर्पण नहीं, समर्पण होता है।
संगठन में - "मैं" नही "हम" होता है।
संगठन में- "आत्मप्रशंसा" नहीं "सर्व सम्मान” होता है।
इसलिए स्वयं को संगठन से जोड़े रखें ।
संगठन सामूहिक हित के लिए होता है, व्यक्तिगत "स्पर्धा" और "स्वार्थ" के लिए नही ।
प्रशंसा सबकी करो निंदा किसी की नहीं ।
व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा वाला पदाधिकारी संगठन में कभी भी सर्वप्रिय नहीं हो सकता ।
सबसे स्नेह, सबका सम्मान ।

No comments:
Post a Comment