दिल्ली चुनाव

 


दिल्ली चुनाव सिर्फ़ एक चुनाव नहीं था, पूरी घेराबंदी थी...


ये घेराबंदी वैसी ही थी जैसी पुराने ज़माने में किसी मज़बूत क़िले को जीतनें के लिए आक्रमणकारी किया करते थे। 


दिल्ली से आप को बेदख़ल करने की घेराबंदी 2022 में शुरू हुई, जब पंजाब चुनाव जीतने के बाद आप ने बीजेपी को उसके सबसे मज़बूत किले गुज़रात में चुनौती दी!! 


तीन दशक बाद बीजेपी को पहली बार किसी ने उसके ही गढ़ में ललकारा था। ख़ैर, बीजेपी गुजरात बचाने में तो सफ़ल रही, पर आप की वजह से तथाकथित “गुजरात मॉडल” की कमज़ोर कड़ियाँ सारे देश के सामने खुल गईं। 


यही वो लम्हा था जब हुक्मरानों को लगा, “इनफ इज इनफ”, और फ़िर शुरू हुई दिल्ली में आप की घेराबंदी। 


चूँकि आप का उदय भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक आंदोलन से हुआ था, लिहाज़ा अगर किसी तरह भ्रष्टाचार को आप से चिपका दें तो उसके मूल समर्थक ही उससे दूर हो जाएँगे। और एक बार ये हो जाए, तो फ़िर गवर्नेंस पर चोट करके खेल ख़त्म किया जा सकता है। ये स्ट्रेटेजी थी बीजेपी की। 


लिहाज़ा अप्रैल-मई 2022 में नए मुख्य सचिव और नए एलजी की नियुक्ति होती है। 


नई शराब नीति के ख़िलाफ़ एलजी साहेब जुलाई 2022 में सीबीआई जाँच की सिफारिश कर देते हैं। केस रजिस्टर होता है और धीमी गति से जाँच शुरू हो जाती है।


दिसंबर 2022 में गुजरात चुनाव के नतीज़े आते हैं। बीजेपी  लगातार आठवी बार वहाँ सरकार बनाने में सफल हो जाती है। पर आप को भी 13% वोट और 5 सीटें मिल जाती है। 


अब दिल्ली में सीबीआई की जाँच तेज़ी पकड़ती है। फ़रवरी 2023 में मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी होती है। 


एक तरफ़ कोर्ट में क़ानूनी दाँव पेंच चल रहा था और दूसरी तरफ़ बीजेपी मीडिया पर अपनी पकड़ का इस्तेमाल कर एक अलग ही नैरेटिव सेट कर रही थी। पूरी दिल्ली शराब में डूब चुकी है, सैकड़ों-हज़ारों करोड़ की रिश्वत ली गई है, ये कहानी मोबाइल फ़ोन के ज़रिए हर घर तक पहुँच गई थी। 


इस बीच मई 2023 में सुप्रीम कोर्ट एक बहुप्रतीक्षित मुक़दमे में अपना फ़ैसला आप सरकार के पक्ष में दे देता है। सुप्रीम कोर्ट मानता है की दिल्ली सरकार के अधिकारी चुनी हुई सरकार के प्रति जवाबदेह होंगे। 


बीजेपी को लगा की इस निर्णय से तो सारा खेल ही बिगड़ जाएगा। 


मात्र एक हफ़्ते के अंदर केंद्र की बीजेपी सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट देती है- पहले अध्यादेश और फिर संसद में क़ानून बनाकर। 


अब यहाँ से एक नया खेल शुरू होता है। 


मुख्य सचिव, वित्त सचिव और एमसीडी कमिश्नर मिलकर दिल्ली को “चोक” करने का प्रोजेक्ट शुरू करते हैं। मार्च 2024 में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद तो इन्हें हर तरफ़ से खुली छूट मिल गई। 


वित्त सचिव, दिल्ली जल बोर्ड की ग्रांट पर ऑब्जेक्शन लगाते हैं जिससे पानी की सप्लाई और सीवर लाइन के मेंटेनेंस पर सीधा प्रभाव पड़ता है।


एमसीडी कमिश्नर कूड़ा उठाने वाली कंपनियों के पेमेंट पर सवाल उठाने लगते हैं, जिससे जगह जगह कूड़े का अंबार इकट्ठा होने लगा। 


ये सभी अधिकारी उस मुख्य सचिव की छत्र छाया में काम कर रहे थे, जिन्हें बीजेपी की केंद्र सरकार ने इस दौरान दो बार सेवा विस्तार दिया। 


जब तक केजरीवाल जेल से बाहर आते हैं, काफ़ी देर हो चुकी थी। जनता पानी-नाली-सड़क की बदहाली से त्रस्त हो चुकी थी। 


अब "फ़ाइनल असॉल्ट" का टाइम था। 


चूँकि बीजेपी तथाकथित शराब घोटाले में जनता को केजरीवाल-सिसोदिया के घर से नोटों की बरामदी की तस्वीरें नहीं दिखा पाई थी, इसलिए अब “शीशमहल” परोसा गया। 


मुख्यमंत्री के सरकारी आवास का रिनोवेशन दो साल पहले हुआ था। पर इसे चुनाव के मौके पर फ़िर से पेश कर जनता को बताया कि, "देखो, केजरीवाल ने ख़ुद का घर तो आलीशान बना लिया पर तुम्हारी गली और नाली टूटी ही रहने दी”। 


पुराने ज़माने में भी जब क़िला अभेद्य लगता था, तो आक्रमणकारी राशन और पानी की सप्लाई रुकवा दिया करते थे।और अंदर ये अफ़वाह फैला देते थे की देखो तुम्हारा राजा तो बड़े आराम से रह रहा है, परेशान तो तुम लोग हो!!


ठीक इसी तर्ज़ पर दिल्ली की सीवर-नाली-कूड़े-पानी की सेवाओं को अफसरों के ज़रिए ध्वस्त करके लोगों को वास्तविक तकलीफ़ दी और फ़िर तथाकथित “शीशमहल” और “शराब घोटाले” के ज़रिए उसे काल्पनिक भ्रष्टाचार से जोड़ दिया। 


लिहाज़ा 10% वोट छिटक गए और बीजेपी अपने मंसूबे में सफल हो गई।  


ग़ज़ब स्ट्रेटेजी थी बीजेपी की, इसे "आईआईएम" जैसे संस्थानों में केस स्टडी के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए। 


पर हाँ, इतना सब करने के बाद भी दिल्ली के 44% वोटर्स ने आप को वोट दिया। सोचिए, अगर बीजेपी साम-दाम-दंड-भेद का सहारा न लेती तो नतीज़ा क्या होता? 


तो बीजेपी भले ही दिल्ली चुनाव जीतने में सफ़ल रही है, पर वो अभी भी आप को हरा नहीं पाई, चिंगारी अभी बुझी नहीं है…

श्री रामचरितमानस की 8 दिव्य चौपाइयां

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