मोदी जी खुद तो बंद हुए नोटों का हिसाब पांच महीने में नहीं दे पाए और व्यापारियों पर कानून थोप रहे हैं हर महीने पांच बार हिसाब देने का।
हिसाब नहीं देने पर जेल की सजा। ऐसी किसी सजा का प्रावधान रिज़र्व बैंक या सरकारी अधिकारियों के लिए क्यों नहीं? जिनको लाखों रूपये महीने की मोटी तनख्वाह चुकाने के बाद भी जनता को हिसाब नहीं दे रहे। व्यापारी तो लाख जोखिमों के साथ व्यापार करता है और देश की अर्थव्यवस्था को चलाता है।
मोदी जी जनता को जवाब क्यों नहीं देते?
आप तो खुद को जनता का चोकीदार कहते है।
हिसाब नहीं देने पर जेल की सजा। ऐसी किसी सजा का प्रावधान रिज़र्व बैंक या सरकारी अधिकारियों के लिए क्यों नहीं? जिनको लाखों रूपये महीने की मोटी तनख्वाह चुकाने के बाद भी जनता को हिसाब नहीं दे रहे। व्यापारी तो लाख जोखिमों के साथ व्यापार करता है और देश की अर्थव्यवस्था को चलाता है।
मोदी जी जनता को जवाब क्यों नहीं देते?
आप तो खुद को जनता का चोकीदार कहते है।

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