जीएसटी और जिन्न


जीएसटी पीड़ित व्यापारी निराश हाल में समंदर किनारे भटक रहा था। तभी उसे पानी में तैरती एक बोतल दिखी। उसने बोतल उठाई और ढक्कन खोला।

फ़ौरन एक जिन्न प्रकट हुआ। बोला- "तुमने मुझे आजाद किया। लेकिन तुम्हारी पहली इच्छा पूरी कर सका, तभी मुझे मुक्ति मिलेगी। बोल क्या चाहिए?"

व्यापारी बोला- "मुझे जीएसटी समझा दो।"

जिन्न ने जादू से जीएसटी की किताब मंगाई। काफी देर उलट-पुलट के बाद रोने लगा।

व्यापारी हैरान। पूछा- "क्या हुआ"

जिन्न बोला- "मैं खुद ही नहीं समझ सका, तो तुझे क्या समझाऊं! अब फिर मुक्ति के लिए एक साल इंतजार करना होगा।"

"एक साल क्यों?" व्यापारी ने पूछा।

जिन्न- "मुझे एक साल में मुक्ति का एक ही मौका मिलता है। मुक्त करने वाले की पहली मांग पूरी करना जरूरी है। लेकिन देखो पांच साल में मेरे साथ कितना बुरा हुआ-



2014 में आजाद करने वाले ने पूछा था कि अच्छे दिन कब आएँगे, मैं बता नहीं पाया।

2015 में आजाद करने वाले ने पूछा था कि 15 लाख कब मिलेंगे? मैं नहीं बता पाया।

2016 में पूछा गया कि नोटबंदी से क्या लाभ हुआ, मैं यह भी नहीं बता नहीं पाया।

तुमने जीएसटी पूछकर 2017 ख़राब किया। देखूँ, अगले साल किस्मत में क्या लिखा है।"

रोता हुआ जिन्न वापस बोतल में घुस गया। व्यापारी ने उसके कहे मुताबिक बोतल में ढक्कन लगाकर समन्दर में फेंक दिया।

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