आम आदमी पार्टी द्वारा
राष्ट्रीय किसान न्याय आंदोलन।।
आम आदमी पार्टी का एलान।
कर्ज मुक्त हो किसान।।
फसल का मिले पूरा दाम।।
आज पूरे देश में किसान बर्बादी की हालत में जी रहा है। जहां एक तरफ वो कर्ज में डूबा हुआ है वहीं दूसरी तरफ उसे उसकी फसलों का पूरा दाम भी नहीं मिल रहा है। इस पर यदि प्रकृति की मार पड़ जाये तो सरकार और बीमा कंपनी या तो किसान को मुआवज़ा देती नहीं है या ना के बराबर देती है और किसान आत्महत्या करने के लिए मज़बूर होने जाता है। "सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में 20 वर्षों में 3 लाख किसानों ने आत्महत्या की है" यानी हर 40 मिनट में 1 किसान आत्महत्या करता है।
प्रधनमंत्री मोदी जी ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अपने भाषणों में किसानों से वादा किया था कि किसानों को उनकी फसल की लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा दिया जाएगा। लेकिन "3 साल बाद" अब मोदी सरकार अपने वादे से मुकर गई है और उसने अदालत में शपथ-पत्र देकर कहा है कि वो किसानों को मुनाफा नहीं देगी। ये किसानों के साथ वादा खिलाफी और धोखा हुआ है।
किसान पर कर्ज़ बढ़ता जा रहा है कर्ज़ा न चुकाने पर किसानों के खेत ज़ब्त कर लिये जाते हैं और जब वो अपने हक की लड़ाई लड़ता है तो उसे गोली मारी जाती है। ताज़ा उदाहरण मध्यप्रदेश के मंदसौर का है जहां सरकार का विरोध कर रहे 6 किसानों को जान से मार दिया गया। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने पिछले सालों में अपने चहेते पूंजीपतियों के "2 लाख 25 हज़ार करोड़ रुपये" का कर्ज माफ कर दिया हैं। आम आदमी पार्टी का मानना है कि जब चंद पूंजीपतियों को लाखों करोड़ रुपये की छूट दी जा सकती है तो किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ किया जा सकता है?
हमारा ये मानना है कि किसानों को उनके उपज की लागत के डेढ़ गुना दाम मिलता है तो इससे किसान आत्मसम्मान के साथ जी सकेगा और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकेगा। किसानों को लाचार बना करके भारत जैसा कृषि प्रधान देश कभी महाशक्ति नहीं बन सकता। जब तक किसान मजबूत नहीं होगा। राष्ट्र को मजबूत करने के लिये भारत की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना होगा। आज देश में किसानों की फसल के दाम डेढ़ गुना कर दिए जायँ तो उनकी क्रय शक्ति में भारी वृद्वि होगी। क्रय शक्ति बढ़ने पर देश के बाज़ार में सामानों की बिक्री में बढ़ोत्तरी होगी और व्यापार बेहतर होगा व्यापारी मजबूत होंगे। जब सामान की मांग बढ़ेगी तो उद्योग-धंधे भी बढ़ेंगे जिससे देश में पूंजी के विकास और बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।
इसलिये किसानों के न्याय की लड़ाई न सिर्फ किसानों की बेहतरी के लिये जरूरी है बल्कि देश को मजबूत बनाने का सबसे बेहतर रास्ता भी है। आम आदमी पार्टी ने उसी मकसद को हासिल करने के लिये "राष्ट्रीय किसान न्याय आंदोलन शुरु किया है।"
"आम आदमी पार्टी की मांगें इस प्रकार हैं"
1 स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार किसानों के फसल का समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना किया जाये।
2 किसानों के कर्ज़ माफ हों।
3 किसानों के लिए सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था हो।
4 मंदसौर गोलीकांड के दोषियों को गिरफ्तार किया जाये।
5 केजरीवाल सरकार की तर्ज़ पर फसल बर्बादी पर 50 हज़ार रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवज़ा किसानों को दिया जाये।
6 दिल्ली की केजरीवाल सरकार की तर्ज़ पर प्रतिवर्ष प्रत्येक गांव "2 करोड़ रुपये" दिया जाए।
7 कृषि आयात निर्यात नीति को किसान हित में बनाया जाए।
8 ग्रामीण इलाकों में कृषि आधरित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाए।
9 बीज, भंडारण और मंडियों की बड़े पैमाने पर व्यवस्था हो।
10 ग्रामीण इलाकों में कम-से-कम 18 घंटे बिजली उपलब्ध हो।
राष्ट्रीय किसान न्याय आंदोलन।।
आम आदमी पार्टी का एलान।
कर्ज मुक्त हो किसान।।
फसल का मिले पूरा दाम।।
आज पूरे देश में किसान बर्बादी की हालत में जी रहा है। जहां एक तरफ वो कर्ज में डूबा हुआ है वहीं दूसरी तरफ उसे उसकी फसलों का पूरा दाम भी नहीं मिल रहा है। इस पर यदि प्रकृति की मार पड़ जाये तो सरकार और बीमा कंपनी या तो किसान को मुआवज़ा देती नहीं है या ना के बराबर देती है और किसान आत्महत्या करने के लिए मज़बूर होने जाता है। "सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में 20 वर्षों में 3 लाख किसानों ने आत्महत्या की है" यानी हर 40 मिनट में 1 किसान आत्महत्या करता है।
प्रधनमंत्री मोदी जी ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अपने भाषणों में किसानों से वादा किया था कि किसानों को उनकी फसल की लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा दिया जाएगा। लेकिन "3 साल बाद" अब मोदी सरकार अपने वादे से मुकर गई है और उसने अदालत में शपथ-पत्र देकर कहा है कि वो किसानों को मुनाफा नहीं देगी। ये किसानों के साथ वादा खिलाफी और धोखा हुआ है।
किसान पर कर्ज़ बढ़ता जा रहा है कर्ज़ा न चुकाने पर किसानों के खेत ज़ब्त कर लिये जाते हैं और जब वो अपने हक की लड़ाई लड़ता है तो उसे गोली मारी जाती है। ताज़ा उदाहरण मध्यप्रदेश के मंदसौर का है जहां सरकार का विरोध कर रहे 6 किसानों को जान से मार दिया गया। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने पिछले सालों में अपने चहेते पूंजीपतियों के "2 लाख 25 हज़ार करोड़ रुपये" का कर्ज माफ कर दिया हैं। आम आदमी पार्टी का मानना है कि जब चंद पूंजीपतियों को लाखों करोड़ रुपये की छूट दी जा सकती है तो किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ किया जा सकता है?
हमारा ये मानना है कि किसानों को उनके उपज की लागत के डेढ़ गुना दाम मिलता है तो इससे किसान आत्मसम्मान के साथ जी सकेगा और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकेगा। किसानों को लाचार बना करके भारत जैसा कृषि प्रधान देश कभी महाशक्ति नहीं बन सकता। जब तक किसान मजबूत नहीं होगा। राष्ट्र को मजबूत करने के लिये भारत की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना होगा। आज देश में किसानों की फसल के दाम डेढ़ गुना कर दिए जायँ तो उनकी क्रय शक्ति में भारी वृद्वि होगी। क्रय शक्ति बढ़ने पर देश के बाज़ार में सामानों की बिक्री में बढ़ोत्तरी होगी और व्यापार बेहतर होगा व्यापारी मजबूत होंगे। जब सामान की मांग बढ़ेगी तो उद्योग-धंधे भी बढ़ेंगे जिससे देश में पूंजी के विकास और बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।
इसलिये किसानों के न्याय की लड़ाई न सिर्फ किसानों की बेहतरी के लिये जरूरी है बल्कि देश को मजबूत बनाने का सबसे बेहतर रास्ता भी है। आम आदमी पार्टी ने उसी मकसद को हासिल करने के लिये "राष्ट्रीय किसान न्याय आंदोलन शुरु किया है।"
"आम आदमी पार्टी की मांगें इस प्रकार हैं"
1 स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार किसानों के फसल का समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना किया जाये।
2 किसानों के कर्ज़ माफ हों।
3 किसानों के लिए सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था हो।
4 मंदसौर गोलीकांड के दोषियों को गिरफ्तार किया जाये।
5 केजरीवाल सरकार की तर्ज़ पर फसल बर्बादी पर 50 हज़ार रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवज़ा किसानों को दिया जाये।
6 दिल्ली की केजरीवाल सरकार की तर्ज़ पर प्रतिवर्ष प्रत्येक गांव "2 करोड़ रुपये" दिया जाए।
7 कृषि आयात निर्यात नीति को किसान हित में बनाया जाए।
8 ग्रामीण इलाकों में कृषि आधरित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाए।
9 बीज, भंडारण और मंडियों की बड़े पैमाने पर व्यवस्था हो।
10 ग्रामीण इलाकों में कम-से-कम 18 घंटे बिजली उपलब्ध हो।
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