संसदीय सचिव

बस कुछ ही दिनों के मेहमान
नरेंद्र मोदी के पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त अचल ज्योति ने दिल्ली के 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाये जाने के कारण अयोग्य घोषित किया ।
कारण -- लाभ का पद बताया।
ये बीसों विधायक ₹1/- भी सेलरी नही लेते ना ही बंगला कार जैसी सरकारी सुविधा लेते।
फिर ये लाभ का पद कैसे ??
आइये नजर डालें भारत के और राज्यों के विधायको पर जो संसदीय सचिव बने बैठे हैं।

*पंजाब--
24- संसदीय सचिव--
सैलरी--₹40000/- प्रतिमाह।
*हरियाणा ---
04 संसदीय सचिव--
सैलरी --₹50000/- प्रतिमाह।
*हिमाचल---
02 संसदीय सचिव--
सैलरी--₹65000/- प्रतिमाह।
*राजस्थान---
05 संसदीय सचिव--
सैलरी--₹27000/- प्रतिमाह।
*गुजरात--
05 संसदीय सचिव--
सेलरी--₹27000/- प्रतिमाह
इसके अलावा
छत्तीसगढ मे --11
मणिपुर मे------05
मिजोरम मे-----7
अरूणाचल प्रदेश मे--15
मेघालय मे ----18
नागालैंड मे----24
विधायक संसदीय सचिव बन कर मोटी सेलरी ले रहे हैं।
*सेलरी के अलावा
₹25000/- आफिस खर्च
₹10000/- टेलिफोन खर्च
  यात्रा भत्ता।
कुल मिलाकर एक विधायक को
लाख रूपये महिना तो मिल ही जाता है *साधारण सोचने वाली बात।
दिल्ली के जो 20 विधायक फूटी कौडी सरकार से नही ले रहे वे लाभ का पद लेने के आरोप मे अयोग्य।
और लाख रूपये महिना लेने वाले अन्य राज्यों के विधायक योग्य।

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