वजन घटाए

7 दिन में घट सकता है 9 किलो वजन, करें बस ये 2 उपाय।

1. अपने खाने की आदत को बदलें
अगर आप एक हफ्ते के अंदर तेजी से दुबले होने या मोटापा कम करने की शुरुआत करना चाहते हैं तो आपको अपने डेली रुटीन में बदलाव लाना होगा। खाने की आदत में तब्दीली करनी होगी। हम जो खाते हैं वो हमारे शरीर को लगता है। उस प्रकार का खाना जिसमें ज्यादा शुगर, कैलोरी हो खाने से परहेज करना चाहिए। मिसाल के तौर पर बेक्ड चीजें, फ्राइड फूड, स्वीट बेवरेज को अपने आहार में शामिल करने से बचना चाहिए। इन चीजों में बहुत ज्यादा फैट होता है जिससे मोटापा बढ़ता है।

2. तेजी से चलने की आदत डालें
घूमना, टहलना, तेजी से पैदल चलना एक ऐसा एक्सरसाइज है जिसके आपका वजन तेजी से कम होता है। इनकी मदद से आप मनचाहा रिजल्ट भी कुछ दिनों में आसानी से पा लेते हैं। महज चलने मात्र से ही आप 0.46 किलोग्राम यानी कि एक पाउंड वजन कम कर सकते हैं, लेकिन यह सब निर्भर करता है कि आप एक हफ्ते में कितना चलते हैं।

ब्लड प्रेशर चार्ट


ब्लड प्रेशर चार्ट

हल्दी वाले दूध के फायदे

हल्दी वाले दूध के 3  बेहतरीन फायदे  और घरेलु उपचार।

आम तौर पर सर्दी होने या शा‍रीरिक पीड़ा होने पर घरेलू इलाज के रूप में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल किया जाता है।

हल्दी अपने एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुणों के लिए जानी जाती है, और दूध, कैल्शि‍यम का स्त्रोत होने के साथ ही शरीर और दिमाग के लिए अमृत के समान है

1..जब चोट लग जाए - यदि किसी कारण से शरीर के बाहरी या अंदरूनी हिस्से में चोट लग जाए, तो हल्दी वाला दूध उसे जल्द से जल्द ठीक करने में बेहद लाभदायक है। क्योंकि यह अपने एंटी बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता।

2 शारीरिक दर्द - शरीर के दर्द में हल्दी वाला दूध आराम देता है।  हाथ पैर व शरीर के अन्य भागों में दर्द की शिकायत होने पर रात को सोने से पहले हल्दी वाले दूध का सेवन करें।

3  त्वचा हो साफ और खूबसूरत -  दूध पीने से त्वचा में प्राकृतिक चमक पैदा होती है, और दूध के साथ हल्दी का सेवन, एंटीसेप्टिक व एंटी बैक्टीरियल होने के कारण त्वचा की समस्याओं जैसे - इंफेक्शन, खुजली, मुंहासे आदि के बैक्टीरिया को धीरे-धीरे खत्म कर देता है। इससे आपकी त्वचा साफ और स्वस्थ और चमकदार दिखाई देती है।

नीम के पत्तों से घटेगी शुगर

नीम के पत्तों से घटेगी शुगर, दूर होगा संक्रमण और दर्द।

नीम का काढ़ा : बढ़ती शुगर को कम करने के लिए नीम का काढ़ा पी सकते हैं। इसके लिए एक मुट्ठी नीम के ताजा पत्तों को पानी से धो लें। इन्हें 2 गिलास पानी में डालकर उबालें। पानी आधा गिलास रहने पर छान लें। पानी की इस मात्रा को दो भागों में बांटकर दिन में दो बार पीएं।

ध्यान रखें : यदि आपका शुगर लेवल ज्यादा रहता है तो दवाओं के साथ नीम भी लें। साथ ही अपना शुगर लेवल हर 2-3 माह में चेक कराएं। ध्यान रखें कि गर्भवती महिला और ऐसी महिलाएं इसे न लें जो ब्रेस्टफीड कराती हैं।

करी पत्ता के फायदे

कढ़ी या करी पत्ता के फायदे।
1. कढ़ी पत्ता में आयरन और फॉलिक एसिड भरपूर मात्रा में होते हैं। इसको खाने से आपको खून की कमी कभी नहीं होगी। इसमें मौजूद विटामिन ए और सी लिवर को भी हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है।
2. कढ़ी पत्ता खाने से ब्लड शुगर का लेवल भी कंट्रोल में रहता है। कढ़ी पत्ता में मौजूद फाइबर इंसुलिन को सही करके आपके ब्लड शुगर के लेवल को कम करता है।
3. कढ़ी पत्ता को रोजाना खाने से आपको कभी मोटापे की शिकायत नहीं रहेगी। कढ़ी पत्ता से कब्ज और एसिडिटी का रोग भी दूर रहता है।
4. कढ़ी पत्ता खाने से आपका दिल मजबूत रहेगा और साथ ही कोलेस्ट्रोल का स्तर भी कंट्रोल में रहेगा।
5. कढ़ी पत्ता एंटीऑक्सिडेंट, एंटी बेक्टिरियल और एंटी फंगल होता है। इसे खाने से आपको किसी तरह का स्किन इंफेक्शन नहीं होगा।
6. कढ़ी पत्ता को पानी में उबालकर पीने से आपको फेफड़े संबंधित बीमारी नहीं होगी।
7. कढ़ी पत्ता को आप नहाते वक्त भी इस्तेमाल कर सकते हैं। नहाने वाले पानी में कढ़ी पत्ता को डाल दें इससे आपकी बॉडी हेल्दी रहेगी और कोई भी त्वचा रोग जल्दी नहीं होगा।
8. जिन लोगों को पसीने बहुत आते हो वो भी कढ़ी पत्ता का इस्तेमाल कर इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं।
9. आपको दांतों से अगर बदबू आती हो तो आप कढ़ी पत्ता खाना शुरू कर दें। कढ़ी पत्ता की खुशबू इतनी अच्छी है कि आपके दांत भी महकने लगेगा और इनको चबाने से हेल्दी भी रहेंगे।
10. कढ़ी पत्ते में वो सारे पोषण तत्व पाये जाते हैं, जो बालों को स्वस्थ रखते हैं। कढ़ी पत्तों को पीस कर इसका लेप बना लें फिर इसे सीधे बालों की जड़ों में लगाएं।           
11. करी पत्ते के अव्वल दर्जे का केलिसियम होता है, अतः एक वयस्क आदमी को।कम से कम 75 ग्राम करी पत्ता अपने भोजन में किसी न किसी रूप में अवश्य शामिल करना चाहिये।

सहजन

दुनिया का सबसे ताकतवर पोषण पूरक आहार है। सहजन (मुनगा)। इसकी जड़ से लेकर फूल, पत्ती, फल्ली, तना, गोंद हर चीज उपयोगी होती है।
           आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है। सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना :- विटामिन सी- संतरे से सात गुना अधिक। विटामिन ए- गाजर से चार गुना अधिक। कैलशियम- दूध से चार गुना अधिक। पोटेशियम- केले से तीन गुना अधिक। प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना अधिक।
            स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाते हैं। इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ' मोरिगा ओलिफेरा ' है। हिंदी में इसे सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं, जो लोग इसके बारे में जानते हैं, वे इसका सेवन जरूर करते हैं।
          सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, साइटिका, गठिया आदि में उपयोगी है। इसकी छाल का सेवन साइटिका, गठिया, लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं।
          सहजन की पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है।
            सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु संचय, वात रोगों में लाभ होता है। इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है। इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हींग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।
          सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है। ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम मिलता है।
            सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है, इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है। इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं।
          सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लोरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है, बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।
            कैंसर तथा शरीर के किसी हिस्से में बनी गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ों में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में भी लाभकारी है |
            सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द तथा दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग, जैसे चेचक आदि के होने का खतरा टल जाता है।
           सहजन में अधिक मात्रा में ओलिक एसिड होता है, जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है। यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो, सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होती है। सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है, इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है, गर्भवती महिला को इसकी पत्तियों का रस देने से डिलीवरी में आसानी होती है।
           सहजन के फली की हरी सब्जी को खाने से बुढ़ापा दूर रहता है इससे आंखों की रोशनी भी अच्छी होती है। सहजन को सूप के रूप में भी पी सकते हैं,  इससे शरीर का खून साफ होता है।
            सहजन का सूप पीना सबसे अधिक फायदेमंद होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। विटामिन सी के अलावा यह बीटा कैरोटीन, प्रोटीन और कई प्रकार के लवणों से भरपूर होता है, यह मैगनीज, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह सभी तत्व शरीर के पूर्ण विकास के लिए बहुत जरूरी हैं।
            कैसे बनाएं सहजन का सूप? सहजन की फली को कई छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लेते हैं। दो कप पानी लेकर इसे धीमी आंच पर उबलने के लिए रख देते हैं, जब पानी उबलने लगे तो इसमें कटे हुए सहजन की फली के टुकड़े डाल देते हैं, इसमें सहजन की पत्त‍ियां भी मिलाई जा सकती हैं, जब पानी आधा बचे तो सहजन की फलियों के बीच का गूदा निकालकर ऊपरी हिस्सा अलग कर लेते हैं, इसमें थोड़ा सा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीना चाहिए।
           1. सहजन के सूप के नियमित सेवन से सेक्सुअल हेल्थ बेहतर होती है. सहजन महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फायदेमंद है।
           2. सहजन में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो कई तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में मददगार है. इसके अलावा इसमें मौजूद विटामिन सी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है।
          3. सहजन का सूप पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने का काम करता है, इसमें मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या नहीं होने देते हैं।
          4. अस्थमा की शिकायत होने पर भी सहजन का सूप पीना फायदेमंद होता है. सर्दी-खांसी और बलगम से छुटकारा पाने के लिए इसका इस्तेमाल घरेलू औषधि के रूप में किया जाता है।
          5. सहजन का सूप खून की सफाई करने में भी मददगार है, खून साफ होने की वजह से चेहरे पर भी निखार आता है।
          6. डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए भी सहजन के सेवन की सलाह दी जाती है।



श्री रामचरितमानस की 8 दिव्य चौपाइयां

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