आस्था और विश्वास
"आस्था और विश्वास"
एक अत्यंत गरीब महिला थी जो ईश्वरीय शक्ति पर बेइंतहा विश्वास करती थी। एक बार अत्यन्त ही विकट स्थिति में आ गई, कई दिनों से खाने के लिए पुरे परिवार को कुछ नहीं मिला। एक दिन उसने रेडियो के माध्यम से ईश्वर को अपना सन्देश भेजा कि वह उसकी मदद करे। यह प्रसारण एक नास्तिक, घमण्डी और अहंकारी उद्योगपति ने सुना और उसने सोचा कि क्यों न इस महिला के साथ कुछ ऐसा मजाक किया जाये कि उसकी ईश्वर के प्रति आस्था डिग जाए ।
उसने अपने सेक्रेटरी को कहा कि वह ढेर सारा खाना और महीने भर का राशन उसके घर पर देकर आ जाये, और जब वह महिला पूछे किसने भेजा है तो कह देना कि ”शैतान” ने भेजा है। जैसे ही महिला के पास सामान पंहुचा पहले तो उसके परिवार ने तृप्त होकर भोजन किया, फिर वह सारा राशन अलमारी में रखने लगी। जब महिला ने पूछा ही नहीं कि यह सब किसने भेजा है तो सेक्रेटरी से रहा नहीं गया और पूछा- आपको क्या जिज्ञासा नही होती कि यह सब किसने भेजा है ।
उस महिला ने बेहतरीन जवाब दिया । मैं इतना क्यों सोंचू या पूंछू, मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है । मेरा भगवान जब आदेश देते है तो शैतानों को भी उस आदेश का पालन करना पड़ता है ।
एक अत्यंत गरीब महिला थी जो ईश्वरीय शक्ति पर बेइंतहा विश्वास करती थी। एक बार अत्यन्त ही विकट स्थिति में आ गई, कई दिनों से खाने के लिए पुरे परिवार को कुछ नहीं मिला। एक दिन उसने रेडियो के माध्यम से ईश्वर को अपना सन्देश भेजा कि वह उसकी मदद करे। यह प्रसारण एक नास्तिक, घमण्डी और अहंकारी उद्योगपति ने सुना और उसने सोचा कि क्यों न इस महिला के साथ कुछ ऐसा मजाक किया जाये कि उसकी ईश्वर के प्रति आस्था डिग जाए ।
उसने अपने सेक्रेटरी को कहा कि वह ढेर सारा खाना और महीने भर का राशन उसके घर पर देकर आ जाये, और जब वह महिला पूछे किसने भेजा है तो कह देना कि ”शैतान” ने भेजा है। जैसे ही महिला के पास सामान पंहुचा पहले तो उसके परिवार ने तृप्त होकर भोजन किया, फिर वह सारा राशन अलमारी में रखने लगी। जब महिला ने पूछा ही नहीं कि यह सब किसने भेजा है तो सेक्रेटरी से रहा नहीं गया और पूछा- आपको क्या जिज्ञासा नही होती कि यह सब किसने भेजा है ।
उस महिला ने बेहतरीन जवाब दिया । मैं इतना क्यों सोंचू या पूंछू, मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है । मेरा भगवान जब आदेश देते है तो शैतानों को भी उस आदेश का पालन करना पड़ता है ।
गुरुपूर्णिमा कब से और क्यों मनाई जाती है
जानिए गुरुपूर्णिमा कब से और क्यों मनाई जाती है ।
आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा एवं व्यासपूर्णिमा कहते हैं । गुरुपूर्णिमा गुरुपूजन का दिन है । गुरुपूर्णिमा का एक अनोखा महत्त्व भी है । अन्य दिनों की तुलना में इस तिथि पर गुरुतत्त्व सहस्र गुना कार्यरत रहता है । इसलिए इस दिन किसी भी व्यक्ति द्वारा जो कुछ भी अपनी साधना के रूप में किया जाता है, उसका फल भी उसे सहस्र गुना अधिक प्राप्त होता है । इस साल 16 जुलाई को गुरुपूर्णिमा है ।
भगवान वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया, 18 पुराणों और उपपुराणों की रचना की । ऋषियों के बिखरे अनुभवों को समाजभोग्य बना कर व्यवस्थित किया । पंचम वेद 'महाभारत' की रचना इसी पूर्णिमा के दिन पूर्ण की और विश्व के सुप्रसिद्ध आर्ष ग्रंथ ब्रह्मसूत्र का लेखन इसी दिन आरंभ किया । तब देवताओं ने वेदव्यासजी का पूजन किया । तभी से व्यासपूर्णिमा मनायी जा रही है । इस दिन जो शिष्य ब्रह्मवेत्ता सदगुरु के श्रीचरणों में पहुँचकर संयम, श्रद्धा, भक्ति, से उनका पूजन करता है उसे वर्षभर के पर्व मनाने का फल मिलता है ।
भारत में अनादिकाल से आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा पर्व के रूप में मनाया जाता रहा है। गुरुपूर्णिमा का त्यौहार तो सभी के लिए है । भौतिक सुख-शांति के साथ-साथ ईश्वरीय आनंद, शांति और ज्ञान प्रदान करनेवाले महाभारत, ब्रह्मसूत्र, श्रीमद्भागवत आदि महान ग्रंथों के रचयिता महापुरुष वेदव्यासजी जैसे ब्रह्मवेत्ताओं का मानवऋणी है ।
भारतीय संस्कृति में सद्गुरु का बड़ा ऊँचा स्थान है । भगवान स्वयं भी अवतार लेते हैं तो गुरु की शरण जाते हैं । भगवान श्रीकृष्ण गुरु सांदीपनिजी के आश्रम में सेवा तथा अभ्यास करते थे । भगवान श्रीराम गुरु वसिष्ठजी के चरणों में बैठकर सत्संग सुनते थे । ऐसे महापुरुषों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तथा उनकी शिक्षाओं का स्मरण करके उसे अपने जीवन मे लानेके लिए इस पवित्र पर्व ‘गुरुपूर्णिमा’ को मनाया जाता है ।
"गुरु का महत्त्व"
गुरुदेव वे हैं, जो साधना बताते हैं, साधना करवाते हैं एवं आनंद की अनुभूति प्रदान करते हैं । गुरु का ध्यान शिष्य के भौतिक सुख की ओर नहीं, अपितु केवल उसकी आध्यात्मिक उन्नति पर होता है । गुरु ही शिष्य को साधना करने के लिए प्रेरित करते हैं, चरण दर चरण साधना करवाते हैं, साधना में उत्पन्न होनेवाली बाधाओं को दूर करते हैं, साधना में टिकाए रखते हैं एवं पूर्णत्व की ओर ले जाते हैं । गुरुके संकल्पके बिना इतना बडा एवं कठिन शिवधनुष उठा पाना असंभव है । इसके विपरीत गुरुकी प्राप्ति हो जाए, तो यह कर पाना सुलभ हो जाता है । श्री गुरुगीतामें ‘गुरु’ संज्ञाकी उत्पत्तिका वर्णन इस प्रकार किया गया है ।
‘गु’ अर्थात अंधकार अथवा अज्ञान एवं ‘रु’ अर्थात तेज, प्रकाश अथवा ज्ञान । इस बातमें कोई संदेह नहीं कि गुरु ही ब्रह्म हैं जो अज्ञानके अंधकारको दूर करते हैं । इससे ज्ञात होगा कि साधकके जीवनमें गुरुका महत्त्व अनन्य है । इसलिए गुरुप्राप्ति ही साधकका प्रथम ध्येय है । गुरुप्राप्ति से ही ईश्वरप्राप्ति होती है अथवा यूं कहें कि गुरुप्राप्ति होना ही ईश्वरप्राप्ति है, ईश्वरप्राप्ति अर्थात मोक्षप्राप्ति- मोक्षप्राप्ति अर्थात निरंतर आनंदावस्था । गुरु हमें इस अवस्थातक पहुंचाते हैं । शिष्यको जीवनमुक्त करनेवाले गुरुके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनेके लिए गुरुपूर्णिमा मनाई जाती है ।
गुरुपूर्णिमा का अध्यात्मशास्त्रीय महत्त्व ।
इस दिन गुरुस्मरण करनेपर शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति होनेमें सहायता होती है । इस दिन गुरुका तारक चैतन्य वायुमंडलमें कार्यरत रहता है । गुरुपूजन करनेवाले जीवको इस चैतन्यका लाभ मिलता है । गुरुपूर्णिमाको व्यासपूर्णिमा भी कहते हैं, गुरुपूर्णिमापर सर्वप्रथम व्यासपूजन किया जाता है ।
कोई भी विषय महर्षि व्यासजीद्वारा अनछुआ नहीं है । महर्षि व्यासजीने चार वेदोंका वर्गीकरण किया । उन्होंने अठारह पुराण, महाभारत इत्यादि ग्रंथों की रचना की है । महर्षि व्यासजीके कारण ही समस्त ज्ञान सर्वप्रथम हमतक पहुंच पाया । इसीलिए महर्षि व्यासजीको ‘आदिगुरु’ कहा जाता है । ऐसी मान्यता है कि उन्हींसे गुरु-परंपरा आरंभ हुई ।
"गुरुपूजन का पर्व"
गुरुपूर्णिमा अर्थात् गुरु के पूजन का पर्व ।
गुरुपूर्णिमा के दिन छत्रपति शिवाजी भी अपने गुरु का विधि-विधान से पूजन करते थे ।
वर्तमान में सब लोग अगर गुरु को नहलाने लग जायें, तिलक करने लग जायें, हार पहनाने लग जायें तो यह संभव नहीं है। लेकिन षोडशोपचार की पूजा से भी अधिक फल देने वाली मानस पूजा करने से तो भाई ! स्वयं गुरु भी नही रोक सकते। मानस पूजा का अधिकार तो सबके पास है।
गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व पर मन-ही-मन हम अपने गुरुदेव की पूजा करते हैं । मन-ही-मन गुरुदेव को कलश भर-भरकर गंगाजल से स्नान कराते हैं । मन-ही-मन उनके श्रीचरणों को पखारते हैं । परब्रह्म परमात्मस्वरूप श्रीसद्गुरुदेव को वस्त्र पहनाते हैं । सुगंधित चंदन का तिलक करते है । सुगंधित गुलाब और मोगरे की माला पहनाते हैं । मनभावन सात्विक प्रसाद का भोग लगाते हैं । मन-ही-मन धूप-दीप से गुरु की आरती करते हैं ।
इस प्रकार हर शिष्य मन-ही-मन अपने दिव्य भावों के अनुसार अपने सद्गुरुदेव का पूजन करके गुरुपूर्णिमा का पावन पर्व मना सकता है । करोड़ों जन्मों के माता-पिता, मित्र-सम्बंधी जो न दे सके, सद्गुरुदेव वह हँसते-हँसते दे डा़लते हैं।
हे गुरुपूर्णिमा ! हे व्यासपूर्णिमा ! तु कृपा करना । गुरुदेव के साथ मेरी श्रद्धा की डोर कभी टूटने न पाये । मैं प्रार्थना करता हूँ गुरुवर ! आपके श्रीचरणों में मेरी श्रद्धा बनी रहे, जब तक है जिन्दगी ।
आजकल के विद्यार्थी बडे़-बडे़ प्रमाणपत्रों के पीछे पड़ते हैं लेकिन प्राचीन काल में विद्यार्थी संयम-सदाचार का व्रत-नियम पाल कर वर्षों तक गुरु के सान्निध्य में रहकर बहुमुखी विद्या उपार्जित करते थे। भगवान श्रीराम वर्षों तक गुरुवर वशिष्ठजी के आश्रम में रहे थे। वर्त्तमान का विद्यार्थी अपनी पहचान बड़ी-बड़ी डिग्रियों से देता है जबकि पहले के शिष्यों में पहचान की महत्ता वह किसका शिष्य है इससे होती थी। आजकल तो संसार का कचरा खोपडी़ में भरने की आदत हो गयी है। यह कचरा ही मान्यताएँ, कृत्रिमता तथा राग-द्वेषादि बढा़ता है और अंत में ये मान्यताएँ ही दुःख में बढा़वा करती हैं। अतः मनुष्य को चाहिये कि वह सदैव जागृत रहकर सत्पुरुषों के सत्संग, सान्निध्य में रहकर परम तत्त्व परमात्मा को पाने का परम पुरुषार्थ करता रहे ।
भारत की ऐसी कौनसी विशेषता है, जो न्यूनतम शब्दोंमें बताई जा सकती है ? ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ । इससे हमें इस परंपराका महत्त्व समझमें आता है । ऐसी परंपराके दर्शन करवानेवाला पर्व युग-युगसे मनाया जा रहा है, तथा वह है, गुरुपूर्णिमा ! हमारे जीवनमें गुरुका क्या स्थान है, गुरुपूर्णिमा हमें इसका स्पष्ट पाठ पढ़ाती है ।
आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा एवं व्यासपूर्णिमा कहते हैं । गुरुपूर्णिमा गुरुपूजन का दिन है । गुरुपूर्णिमा का एक अनोखा महत्त्व भी है । अन्य दिनों की तुलना में इस तिथि पर गुरुतत्त्व सहस्र गुना कार्यरत रहता है । इसलिए इस दिन किसी भी व्यक्ति द्वारा जो कुछ भी अपनी साधना के रूप में किया जाता है, उसका फल भी उसे सहस्र गुना अधिक प्राप्त होता है । इस साल 16 जुलाई को गुरुपूर्णिमा है ।
भगवान वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया, 18 पुराणों और उपपुराणों की रचना की । ऋषियों के बिखरे अनुभवों को समाजभोग्य बना कर व्यवस्थित किया । पंचम वेद 'महाभारत' की रचना इसी पूर्णिमा के दिन पूर्ण की और विश्व के सुप्रसिद्ध आर्ष ग्रंथ ब्रह्मसूत्र का लेखन इसी दिन आरंभ किया । तब देवताओं ने वेदव्यासजी का पूजन किया । तभी से व्यासपूर्णिमा मनायी जा रही है । इस दिन जो शिष्य ब्रह्मवेत्ता सदगुरु के श्रीचरणों में पहुँचकर संयम, श्रद्धा, भक्ति, से उनका पूजन करता है उसे वर्षभर के पर्व मनाने का फल मिलता है ।
भारत में अनादिकाल से आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा पर्व के रूप में मनाया जाता रहा है। गुरुपूर्णिमा का त्यौहार तो सभी के लिए है । भौतिक सुख-शांति के साथ-साथ ईश्वरीय आनंद, शांति और ज्ञान प्रदान करनेवाले महाभारत, ब्रह्मसूत्र, श्रीमद्भागवत आदि महान ग्रंथों के रचयिता महापुरुष वेदव्यासजी जैसे ब्रह्मवेत्ताओं का मानवऋणी है ।
भारतीय संस्कृति में सद्गुरु का बड़ा ऊँचा स्थान है । भगवान स्वयं भी अवतार लेते हैं तो गुरु की शरण जाते हैं । भगवान श्रीकृष्ण गुरु सांदीपनिजी के आश्रम में सेवा तथा अभ्यास करते थे । भगवान श्रीराम गुरु वसिष्ठजी के चरणों में बैठकर सत्संग सुनते थे । ऐसे महापुरुषों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तथा उनकी शिक्षाओं का स्मरण करके उसे अपने जीवन मे लानेके लिए इस पवित्र पर्व ‘गुरुपूर्णिमा’ को मनाया जाता है ।
"गुरु का महत्त्व"
गुरुदेव वे हैं, जो साधना बताते हैं, साधना करवाते हैं एवं आनंद की अनुभूति प्रदान करते हैं । गुरु का ध्यान शिष्य के भौतिक सुख की ओर नहीं, अपितु केवल उसकी आध्यात्मिक उन्नति पर होता है । गुरु ही शिष्य को साधना करने के लिए प्रेरित करते हैं, चरण दर चरण साधना करवाते हैं, साधना में उत्पन्न होनेवाली बाधाओं को दूर करते हैं, साधना में टिकाए रखते हैं एवं पूर्णत्व की ओर ले जाते हैं । गुरुके संकल्पके बिना इतना बडा एवं कठिन शिवधनुष उठा पाना असंभव है । इसके विपरीत गुरुकी प्राप्ति हो जाए, तो यह कर पाना सुलभ हो जाता है । श्री गुरुगीतामें ‘गुरु’ संज्ञाकी उत्पत्तिका वर्णन इस प्रकार किया गया है ।
‘गु’ अर्थात अंधकार अथवा अज्ञान एवं ‘रु’ अर्थात तेज, प्रकाश अथवा ज्ञान । इस बातमें कोई संदेह नहीं कि गुरु ही ब्रह्म हैं जो अज्ञानके अंधकारको दूर करते हैं । इससे ज्ञात होगा कि साधकके जीवनमें गुरुका महत्त्व अनन्य है । इसलिए गुरुप्राप्ति ही साधकका प्रथम ध्येय है । गुरुप्राप्ति से ही ईश्वरप्राप्ति होती है अथवा यूं कहें कि गुरुप्राप्ति होना ही ईश्वरप्राप्ति है, ईश्वरप्राप्ति अर्थात मोक्षप्राप्ति- मोक्षप्राप्ति अर्थात निरंतर आनंदावस्था । गुरु हमें इस अवस्थातक पहुंचाते हैं । शिष्यको जीवनमुक्त करनेवाले गुरुके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनेके लिए गुरुपूर्णिमा मनाई जाती है ।
गुरुपूर्णिमा का अध्यात्मशास्त्रीय महत्त्व ।
इस दिन गुरुस्मरण करनेपर शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति होनेमें सहायता होती है । इस दिन गुरुका तारक चैतन्य वायुमंडलमें कार्यरत रहता है । गुरुपूजन करनेवाले जीवको इस चैतन्यका लाभ मिलता है । गुरुपूर्णिमाको व्यासपूर्णिमा भी कहते हैं, गुरुपूर्णिमापर सर्वप्रथम व्यासपूजन किया जाता है ।
कोई भी विषय महर्षि व्यासजीद्वारा अनछुआ नहीं है । महर्षि व्यासजीने चार वेदोंका वर्गीकरण किया । उन्होंने अठारह पुराण, महाभारत इत्यादि ग्रंथों की रचना की है । महर्षि व्यासजीके कारण ही समस्त ज्ञान सर्वप्रथम हमतक पहुंच पाया । इसीलिए महर्षि व्यासजीको ‘आदिगुरु’ कहा जाता है । ऐसी मान्यता है कि उन्हींसे गुरु-परंपरा आरंभ हुई ।
"गुरुपूजन का पर्व"
गुरुपूर्णिमा अर्थात् गुरु के पूजन का पर्व ।
गुरुपूर्णिमा के दिन छत्रपति शिवाजी भी अपने गुरु का विधि-विधान से पूजन करते थे ।
वर्तमान में सब लोग अगर गुरु को नहलाने लग जायें, तिलक करने लग जायें, हार पहनाने लग जायें तो यह संभव नहीं है। लेकिन षोडशोपचार की पूजा से भी अधिक फल देने वाली मानस पूजा करने से तो भाई ! स्वयं गुरु भी नही रोक सकते। मानस पूजा का अधिकार तो सबके पास है।
गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व पर मन-ही-मन हम अपने गुरुदेव की पूजा करते हैं । मन-ही-मन गुरुदेव को कलश भर-भरकर गंगाजल से स्नान कराते हैं । मन-ही-मन उनके श्रीचरणों को पखारते हैं । परब्रह्म परमात्मस्वरूप श्रीसद्गुरुदेव को वस्त्र पहनाते हैं । सुगंधित चंदन का तिलक करते है । सुगंधित गुलाब और मोगरे की माला पहनाते हैं । मनभावन सात्विक प्रसाद का भोग लगाते हैं । मन-ही-मन धूप-दीप से गुरु की आरती करते हैं ।
इस प्रकार हर शिष्य मन-ही-मन अपने दिव्य भावों के अनुसार अपने सद्गुरुदेव का पूजन करके गुरुपूर्णिमा का पावन पर्व मना सकता है । करोड़ों जन्मों के माता-पिता, मित्र-सम्बंधी जो न दे सके, सद्गुरुदेव वह हँसते-हँसते दे डा़लते हैं।
हे गुरुपूर्णिमा ! हे व्यासपूर्णिमा ! तु कृपा करना । गुरुदेव के साथ मेरी श्रद्धा की डोर कभी टूटने न पाये । मैं प्रार्थना करता हूँ गुरुवर ! आपके श्रीचरणों में मेरी श्रद्धा बनी रहे, जब तक है जिन्दगी ।
आजकल के विद्यार्थी बडे़-बडे़ प्रमाणपत्रों के पीछे पड़ते हैं लेकिन प्राचीन काल में विद्यार्थी संयम-सदाचार का व्रत-नियम पाल कर वर्षों तक गुरु के सान्निध्य में रहकर बहुमुखी विद्या उपार्जित करते थे। भगवान श्रीराम वर्षों तक गुरुवर वशिष्ठजी के आश्रम में रहे थे। वर्त्तमान का विद्यार्थी अपनी पहचान बड़ी-बड़ी डिग्रियों से देता है जबकि पहले के शिष्यों में पहचान की महत्ता वह किसका शिष्य है इससे होती थी। आजकल तो संसार का कचरा खोपडी़ में भरने की आदत हो गयी है। यह कचरा ही मान्यताएँ, कृत्रिमता तथा राग-द्वेषादि बढा़ता है और अंत में ये मान्यताएँ ही दुःख में बढा़वा करती हैं। अतः मनुष्य को चाहिये कि वह सदैव जागृत रहकर सत्पुरुषों के सत्संग, सान्निध्य में रहकर परम तत्त्व परमात्मा को पाने का परम पुरुषार्थ करता रहे ।
भारत की ऐसी कौनसी विशेषता है, जो न्यूनतम शब्दोंमें बताई जा सकती है ? ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ । इससे हमें इस परंपराका महत्त्व समझमें आता है । ऐसी परंपराके दर्शन करवानेवाला पर्व युग-युगसे मनाया जा रहा है, तथा वह है, गुरुपूर्णिमा ! हमारे जीवनमें गुरुका क्या स्थान है, गुरुपूर्णिमा हमें इसका स्पष्ट पाठ पढ़ाती है ।
गुरु पूर्णिमा पर सभी गुरूओं को प्रणाम
गुरु पूर्णिमा पर सभी गुरूओं को
प्रणाम करता हूँ।
कुछ लोग मुझसे ज्ञान में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे संस्कार में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे बल में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे धन में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे सादगी में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे पराक्रम में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे बुद्धिमता में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे ईमानदारी में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे बोल व्यवहार में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे सेवा कार्यों में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे कर्मशीलता में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे गम्भीरता में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे भोलेपन में श्रेष्ठ है |
अतः सभी श्रेष्ठ व्यक्तियों को प्रणाम करता हूँ ।
प्रणाम करता हूँ।
कुछ लोग मुझसे ज्ञान में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे संस्कार में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे बल में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे धन में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे सादगी में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे पराक्रम में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे बुद्धिमता में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे ईमानदारी में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे बोल व्यवहार में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे सेवा कार्यों में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे कर्मशीलता में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे गम्भीरता में श्रेष्ठ है |
कुछ लोग मुझसे भोलेपन में श्रेष्ठ है |
अतः सभी श्रेष्ठ व्यक्तियों को प्रणाम करता हूँ ।
माइग्रेन - आधे सिर का दर्द
माइग्रेन (आधे सिर का दर्द)
इस रोग से पीड़ित रोगी के सिर में बहुत तेज दर्द होता है तथा यह दर्द सिर के एक भाग में होता है। इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है।
माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग होने का लक्षण -
इस रोग से पीड़ित रोगी के सिर के आधे भाग में तेज दर्द होता है तथा सिर में दर्द होने के साथ-साथ रोगी को उल्टी होने की इच्छा भी होती है। इसके अलावा रोगी को चिड़चडाहट तथा दृष्टिदोष भी उत्पन्न होने लगता है। इस रोग का प्रभाव अधिकतर निश्चित समय पर होता है।
माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग होने का कारण-
1. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग रोगी व्यक्ति को दूसरे रोगों के फलस्वरूप हो जाता है जैसे- नजला, जुकाम, शरीर के अन्य अंग रोग ग्रस्त होना, पुरानी कब्ज आदि।
2. स्त्रियों को यदि मासिकधर्म में कोई गड़बड़ी हो जाती है तो इसके कारण स्त्रियों को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
3. आंखों में दृष्टिदोष तथा अन्य रोग होने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
4. यकृत (जिगर) में किसी प्रकार की खराबी तथा शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण व्यक्ति को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
5. असंतुलित भोजन का अधिक उपयोग करने के कारण रोगी को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो सकता है।
6. अधिक श्रम-विश्राम करने, शारीरिक तथा मानसिक तनाव अधिक हो जाने के कारण भी यह रोग व्यक्तियों को हो सकता है।
7. औषधियों का अधिक उपयोग करने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
माइग्रेन रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार -
1. इस रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को रसाहार (चुकन्दर, ककड़ी, पत्तागोभी, गाजर का रस तथा नारियल पानी) आदि का सेवन भोजन में करना चाहिए और इसके साथ-साथ उपवास रखना चाहिए।
2. माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को अधिक मात्रा में फल, सलाद तथा अंकुरित भोजन करना चाहिए और इसके बाद सामान्य भोजन का सेवन करना चाहिए।
3. रोगी व्यक्ति को अपने भोजन में मेथी, बथुआ, अंजीर, आंवला, नींबू, अनार, अमरूद, सेब, संतरा तथा धनिया अधिक लेना चाहिए। माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को भोजन संबन्धित गलत आदतों जैसे- रात के समय में देर से भोजन करना तथा समय पर भोजन न करना आदि को छोड़ देना चाहिए।
4. रोगी व्यक्ति को मसालेदार भोजन का उपयोग नहीं करना चाहिए तथा इसके अलावा बासी, डिब्बाबंद तथा मिठाइयों आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
5. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग में रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ सुबह के समय में चाटना चाहिए तथा इसके अलावा दूब का रस भी सुबह के समय में चाट सकते हैं। जिसके फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
6. माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) का इलाज करने के लिए पीपल के कोमल पत्तों का रस रोगी व्यक्ति को सुबह तथा शाम सेवन करने के लिए देने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
7. माइग्रेन रोग का इलाज करने के लिए रोगी व्यक्ति के माथे पर पत्ता गोभी का पत्ता प्रतिदिन बांधना चाहिए, जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
8. प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा नाक से भाप देकर रोगी व्यक्ति के माइग्रेन रोग को ठीक किया जा सकता है। नाक से भाप लेने के लिए सबसे पहल एक छोटे से बर्तन में गर्म पानी लेना चाहिए। इसके बाद रोगी को उस बर्तन पर झुककर नाक से भाप लेना चाहिए। इस क्रिया को कुछ दिनों तक करने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
9. माइग्रेन रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकर के स्नान भी हैं जिन्हे प्रतिदिन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है। ये स्नान इस प्रकार हैं-रीढ़स्नान, कुंजल, मेहनस्नान तथा गर्मपाद स्नान।
10. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग का इलाज करने के लिए प्रतिदिन ध्यान, शवासन, योगनिद्रा, प्राणायाम या फिर योगासन क्रिया करनी चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
इस रोग से पीड़ित रोगी के सिर में बहुत तेज दर्द होता है तथा यह दर्द सिर के एक भाग में होता है। इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है।
माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग होने का लक्षण -
इस रोग से पीड़ित रोगी के सिर के आधे भाग में तेज दर्द होता है तथा सिर में दर्द होने के साथ-साथ रोगी को उल्टी होने की इच्छा भी होती है। इसके अलावा रोगी को चिड़चडाहट तथा दृष्टिदोष भी उत्पन्न होने लगता है। इस रोग का प्रभाव अधिकतर निश्चित समय पर होता है।
माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग होने का कारण-
1. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग रोगी व्यक्ति को दूसरे रोगों के फलस्वरूप हो जाता है जैसे- नजला, जुकाम, शरीर के अन्य अंग रोग ग्रस्त होना, पुरानी कब्ज आदि।
2. स्त्रियों को यदि मासिकधर्म में कोई गड़बड़ी हो जाती है तो इसके कारण स्त्रियों को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
3. आंखों में दृष्टिदोष तथा अन्य रोग होने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
4. यकृत (जिगर) में किसी प्रकार की खराबी तथा शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण व्यक्ति को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
5. असंतुलित भोजन का अधिक उपयोग करने के कारण रोगी को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो सकता है।
6. अधिक श्रम-विश्राम करने, शारीरिक तथा मानसिक तनाव अधिक हो जाने के कारण भी यह रोग व्यक्तियों को हो सकता है।
7. औषधियों का अधिक उपयोग करने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
माइग्रेन रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार -
1. इस रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को रसाहार (चुकन्दर, ककड़ी, पत्तागोभी, गाजर का रस तथा नारियल पानी) आदि का सेवन भोजन में करना चाहिए और इसके साथ-साथ उपवास रखना चाहिए।
2. माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को अधिक मात्रा में फल, सलाद तथा अंकुरित भोजन करना चाहिए और इसके बाद सामान्य भोजन का सेवन करना चाहिए।
3. रोगी व्यक्ति को अपने भोजन में मेथी, बथुआ, अंजीर, आंवला, नींबू, अनार, अमरूद, सेब, संतरा तथा धनिया अधिक लेना चाहिए। माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को भोजन संबन्धित गलत आदतों जैसे- रात के समय में देर से भोजन करना तथा समय पर भोजन न करना आदि को छोड़ देना चाहिए।
4. रोगी व्यक्ति को मसालेदार भोजन का उपयोग नहीं करना चाहिए तथा इसके अलावा बासी, डिब्बाबंद तथा मिठाइयों आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
5. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग में रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ सुबह के समय में चाटना चाहिए तथा इसके अलावा दूब का रस भी सुबह के समय में चाट सकते हैं। जिसके फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
6. माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) का इलाज करने के लिए पीपल के कोमल पत्तों का रस रोगी व्यक्ति को सुबह तथा शाम सेवन करने के लिए देने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
7. माइग्रेन रोग का इलाज करने के लिए रोगी व्यक्ति के माथे पर पत्ता गोभी का पत्ता प्रतिदिन बांधना चाहिए, जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
8. प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा नाक से भाप देकर रोगी व्यक्ति के माइग्रेन रोग को ठीक किया जा सकता है। नाक से भाप लेने के लिए सबसे पहल एक छोटे से बर्तन में गर्म पानी लेना चाहिए। इसके बाद रोगी को उस बर्तन पर झुककर नाक से भाप लेना चाहिए। इस क्रिया को कुछ दिनों तक करने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
9. माइग्रेन रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकर के स्नान भी हैं जिन्हे प्रतिदिन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है। ये स्नान इस प्रकार हैं-रीढ़स्नान, कुंजल, मेहनस्नान तथा गर्मपाद स्नान।
10. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग का इलाज करने के लिए प्रतिदिन ध्यान, शवासन, योगनिद्रा, प्राणायाम या फिर योगासन क्रिया करनी चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
रुपये की गिरावट के लिये जिम्मेदार कौन
सन 1917 में भारत का ₹1रुपया अमेरिका के $13 डॉलर के बराबर था ।
भारत की आजादी के समय अमेरिका का $1 डॉलर भारत के ₹1 रुपया के बराबर था ।
उसके बाद देश मे ऐसे नेता और सरकारे आयी जिनकी खराब नीतियों के कारण भारत के रुपया से नीचे रहने वाला अमेरिका का एक डॉलर आज भारत के ₹74 रुपया के बराबर पंहुच गया है ।
इसमे गलती नेताओ की नही हम वोट देने वालो की है । जिन्होंने नेताओ की योग्यता न देखकर जाति और धर्म देखकर वोट दिया है ।
भारत की आजादी के समय अमेरिका का $1 डॉलर भारत के ₹1 रुपया के बराबर था ।
उसके बाद देश मे ऐसे नेता और सरकारे आयी जिनकी खराब नीतियों के कारण भारत के रुपया से नीचे रहने वाला अमेरिका का एक डॉलर आज भारत के ₹74 रुपया के बराबर पंहुच गया है ।
इसमे गलती नेताओ की नही हम वोट देने वालो की है । जिन्होंने नेताओ की योग्यता न देखकर जाति और धर्म देखकर वोट दिया है ।
ककोड़ा दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी
दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी, कुछ दिन खाने से ही शरीर में दिखेगा जबरदस्त चमत्कार ।
आजकल के दौर में जंक फूड का इतना क्रेज बढ़ चुका है कि लोग अपने शरीर को जरूरी ताकत देनी वाली सब्जी, दाल का सेवन कम ही करते हैं. लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ सबज्यिां ऐसी होती हैं, जिन्हें कुछ दिन खाने पर ही इसका फायदा मिल जाता है । ऐसी ही एक सब्जी है ककोड़ा इसे कंटोला भी कहते है । यह दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है । इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है । इस सब्जी में इतनी ताकत होती है कि महज कुछ दिन के सेवन से ही आपका शरीर तंदुरुस्त बन जाता है या यूं कहें कि फौलादी बन जाता है । कंटोला को ककोड़े और मीठा करेला नाम से भी जाना जाता है ।
अगर आप भी अपनी रोजाना डाइट में इसे शामिल करते हैं तो दूसरे तत्वों और फाइबर की कमी को भी यह पूरी करती है । ककोड़े यानी मीठा करेला को सेहतमंद माना जाता है । आयुर्वेद में भी इसे सबसे ताकतवर सब्जी के रूप में माना गया है ।
ककोड़ा की सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूर होती है । इसे रोज खाने से आपका शरीर ताकतवर बनता है । इसके लिए कहा जाता है कि इसमें मीट से 50 गुना ज्यादा ताकत और प्रोटीन होता है. कंटोल में मौजूद फाइटोकेमिकल्स स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में काफी मदद करता है । यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्जी है ।
ककोड़ा आमतौर पर मॉनसून के मौसम में भारतीय बाजारों में देखा जाता है । इसमें कई स्वास्थ्य लाभ है जिसकी वजह से इसकी खेती दुनियाभर में शुरू हो गई है । इसकी मुख्य रूप से भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती की जाती है ।
ककोड़ा वजन घटाने में सक्षम है । कंटोला में प्रोटीन और आयरन भरपूर मात्रा में होता है जबकि कैलोरी कम मात्रा में होती है. यदि 100 ग्राम कंटोला की सब्जी का सेवन करते हैं तो 17 कैलोरी प्राप्त होती है । जिससे वजन घटाने वाले लोगों के लिए यह बेहतर विकल्प है ।
ककोड़ा कैंसर से बचाव करता है । कंटोला में मौजूद ल्युटेन जैसे केरोटोनोइडस विभिन्न नेत्र रोग, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर की रोकथाम में सहायक है ।
ककोड़ा खाने से पाचन क्रिया दुरुस्त होती है । अगर आप इसकी सब्जी नहीं खाना चाहते तो अचार बनाकर भी सेवन कर सकते हैं । आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज के लिए इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं । यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।
ककोड़ा हाई ब्लड प्रेशर को दूर करता है । कंटोला में मौजूद मोमोरडीसिन तत्व और फाइबर की अधिक मात्रा शरीर के लिए रामबाण हैं । मोमोरेडीसिन तत्व एंटीऑक्सीडेंट, एंटीडायबिटीज और एंटीस्टे्रस की तरह काम करता है और वजन और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है ।
ककोड़ा एंटी एलर्जिक होता है । कंटोल में एंटी-एलर्जन और एनाल्जेसिक सर्दी खांसी से राहत प्रदान करने और इसे रोकन में काफी सहायक है । इसी लिये अपने आहार में ककोड़ा / कंटोला को शामिल करें ।
आजकल के दौर में जंक फूड का इतना क्रेज बढ़ चुका है कि लोग अपने शरीर को जरूरी ताकत देनी वाली सब्जी, दाल का सेवन कम ही करते हैं. लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ सबज्यिां ऐसी होती हैं, जिन्हें कुछ दिन खाने पर ही इसका फायदा मिल जाता है । ऐसी ही एक सब्जी है ककोड़ा इसे कंटोला भी कहते है । यह दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है । इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है । इस सब्जी में इतनी ताकत होती है कि महज कुछ दिन के सेवन से ही आपका शरीर तंदुरुस्त बन जाता है या यूं कहें कि फौलादी बन जाता है । कंटोला को ककोड़े और मीठा करेला नाम से भी जाना जाता है ।
अगर आप भी अपनी रोजाना डाइट में इसे शामिल करते हैं तो दूसरे तत्वों और फाइबर की कमी को भी यह पूरी करती है । ककोड़े यानी मीठा करेला को सेहतमंद माना जाता है । आयुर्वेद में भी इसे सबसे ताकतवर सब्जी के रूप में माना गया है ।
ककोड़ा की सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूर होती है । इसे रोज खाने से आपका शरीर ताकतवर बनता है । इसके लिए कहा जाता है कि इसमें मीट से 50 गुना ज्यादा ताकत और प्रोटीन होता है. कंटोल में मौजूद फाइटोकेमिकल्स स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में काफी मदद करता है । यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्जी है ।
ककोड़ा आमतौर पर मॉनसून के मौसम में भारतीय बाजारों में देखा जाता है । इसमें कई स्वास्थ्य लाभ है जिसकी वजह से इसकी खेती दुनियाभर में शुरू हो गई है । इसकी मुख्य रूप से भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती की जाती है ।
ककोड़ा वजन घटाने में सक्षम है । कंटोला में प्रोटीन और आयरन भरपूर मात्रा में होता है जबकि कैलोरी कम मात्रा में होती है. यदि 100 ग्राम कंटोला की सब्जी का सेवन करते हैं तो 17 कैलोरी प्राप्त होती है । जिससे वजन घटाने वाले लोगों के लिए यह बेहतर विकल्प है ।
ककोड़ा कैंसर से बचाव करता है । कंटोला में मौजूद ल्युटेन जैसे केरोटोनोइडस विभिन्न नेत्र रोग, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर की रोकथाम में सहायक है ।
ककोड़ा खाने से पाचन क्रिया दुरुस्त होती है । अगर आप इसकी सब्जी नहीं खाना चाहते तो अचार बनाकर भी सेवन कर सकते हैं । आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज के लिए इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं । यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।
ककोड़ा हाई ब्लड प्रेशर को दूर करता है । कंटोला में मौजूद मोमोरडीसिन तत्व और फाइबर की अधिक मात्रा शरीर के लिए रामबाण हैं । मोमोरेडीसिन तत्व एंटीऑक्सीडेंट, एंटीडायबिटीज और एंटीस्टे्रस की तरह काम करता है और वजन और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है ।
ककोड़ा एंटी एलर्जिक होता है । कंटोल में एंटी-एलर्जन और एनाल्जेसिक सर्दी खांसी से राहत प्रदान करने और इसे रोकन में काफी सहायक है । इसी लिये अपने आहार में ककोड़ा / कंटोला को शामिल करें ।
शुगर की बीमारी का घरेलू ईलाज
शुगर की बीमारी का घरेलू ईलाज व ओषधि ।
(1) नीम की गुठली - 50 ग्राम
(2) जामुन की गुठली - 50 ग्राम
(3) करेले के बीज - 50 ग्राम
(4) चिरैता - 50 ग्राम
(5) काले तिल - 50 ग्राम
(6) अजवायन - 50 ग्राम
(7) मेथी - 50 ग्राम
इन सभी चीजों को समान अनुपात में लेकर बारीक कूट - पीस कर चूर्ण बना ले । ओर सुबह खाली पेट एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ ले ।
(1) नीम की गुठली - 50 ग्राम
(2) जामुन की गुठली - 50 ग्राम
(3) करेले के बीज - 50 ग्राम
(4) चिरैता - 50 ग्राम
(5) काले तिल - 50 ग्राम
(6) अजवायन - 50 ग्राम
(7) मेथी - 50 ग्राम
इन सभी चीजों को समान अनुपात में लेकर बारीक कूट - पीस कर चूर्ण बना ले । ओर सुबह खाली पेट एक चम्मच चूर्ण पानी के साथ ले ।
क्यों करते हो गुरुर
क्यों करते हो गुरुर अपने चार दिन के ठाठ पर , मुठ्ठी भी खाली रहेंगी जब पहुँचोगे घाट पर ।
कुछ गंभीर सवाल सोचने के लिये ।
क्या हम बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स,
केटरर्स और डेकोरेटर्स के लिए कमा रहे हैं ?
हम बड़े-बड़े क़ीमती मकानों और बेहद खर्चीली शादियों से किसे इम्प्रेस करना चाहते हैं ?
क्या आपको याद है कि, दो दिन पहले किसी की शादी पर आपने क्या खाया था ?
जीवन के प्रारंभिक वर्षों में, क्यों हम पशुओं की तरह काम में जुते रहते हैं ?
कितनी पीढ़ियों के, खान पान और
लालन पालन की व्यवस्था करनी है हमें ?
हम में से अधिकाँश लोगों के दो बच्चे हैं। बहुतों का तो सिर्फ एक ही बच्चा है।
"हमारी जरूरत कितनी हैं ? और हम पाना कितना चाहते हैं"?
इस बारे में सोचिए।
क्या हमारी अगली पीढ़ी कमाने में सक्षम नहीं है जो, हम उनके लिए ज्यादा से ज्यादा बचत कर देना चाहते हैं ?
क्या हम सप्ताह में कुछ समय अपने मित्रों, अपने परिवार और अपने लिए नहीं निकाल सकते ?
क्या आप अपनी मासिक आय का 5% अपने आनंद के लिए, अपनी ख़ुशी के लिए खर्च करते हैं ?
सामान्यतः जवाब नहीं में ही होता है ।
हम कमाने के साथ साथ आनंद भी क्यों नहीं प्राप्त कर सकते ?
इससे पहले कि आप किसी बीमारी का शिकार हो जाएँ, इससे पहले कि,
कोलोस्ट्रोल आपके हार्ट को ब्लॉक कर दे,
आनंद प्राप्ति के लिए समय निकालिए !!
हम किसी प्रॉपर्टी के मालिक नहीं होते,
सिर्फ कुछ कागजातों, कुछ दस्तावेजों पर
अस्थाई रूप से हमारा नाम लिखा होता है।
ईश्वर भी व्यंग्यात्मक रूप से हँसेगा
जब कोई उसे कहेगा कि,
"मैं जमीन के इस टुकड़े का मालिक हूँ "
किसी के बारे में, उसके शानदार कपड़े और बढ़िया कार देखकर, राय कायम मत कीजिए।
हमारे महान गणितज्ञ और वैज्ञानिक व शिक्षक स्कूटर पर ही आया जाया करते थे !
धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.. "सिर्फ धनवान होना गलत है"
आइए ज़िंदगी को पकड़ें, इससे पहले कि,
जिंदगी हमें पकड़ ले ।
एक दिन हम सब जुदा हो जाएँगे, तब अपनी बातें, अपने सपने हम बहुत याद करेंगे।
दिन, महीने, साल गुजर जाएँगे, शायद कभी कोई संपर्क भी नहीं रहेगा।
एक रोज हमारी बहुत पुरानी तस्वीर देखकर हमारे बच्चे हमी से पूछेंगे कि,
"तस्वीर में ये दुसरे लोग कौन हैं" ?
तब हम मुस्कुराकर, अपने अदृश्य आँसुओं के साथ बड़े फख्र से कहेंगे---
"ये वो लोग हैं, जिनके साथ मैंने अपने जीवन के बेहतरीन दिन गुजारे हैं। "
कुछ गंभीर सवाल सोचने के लिये ।
क्या हम बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स,
केटरर्स और डेकोरेटर्स के लिए कमा रहे हैं ?
हम बड़े-बड़े क़ीमती मकानों और बेहद खर्चीली शादियों से किसे इम्प्रेस करना चाहते हैं ?
क्या आपको याद है कि, दो दिन पहले किसी की शादी पर आपने क्या खाया था ?
जीवन के प्रारंभिक वर्षों में, क्यों हम पशुओं की तरह काम में जुते रहते हैं ?
कितनी पीढ़ियों के, खान पान और
लालन पालन की व्यवस्था करनी है हमें ?
हम में से अधिकाँश लोगों के दो बच्चे हैं। बहुतों का तो सिर्फ एक ही बच्चा है।
"हमारी जरूरत कितनी हैं ? और हम पाना कितना चाहते हैं"?
इस बारे में सोचिए।
क्या हमारी अगली पीढ़ी कमाने में सक्षम नहीं है जो, हम उनके लिए ज्यादा से ज्यादा बचत कर देना चाहते हैं ?
क्या हम सप्ताह में कुछ समय अपने मित्रों, अपने परिवार और अपने लिए नहीं निकाल सकते ?
क्या आप अपनी मासिक आय का 5% अपने आनंद के लिए, अपनी ख़ुशी के लिए खर्च करते हैं ?
सामान्यतः जवाब नहीं में ही होता है ।
हम कमाने के साथ साथ आनंद भी क्यों नहीं प्राप्त कर सकते ?
इससे पहले कि आप किसी बीमारी का शिकार हो जाएँ, इससे पहले कि,
कोलोस्ट्रोल आपके हार्ट को ब्लॉक कर दे,
आनंद प्राप्ति के लिए समय निकालिए !!
हम किसी प्रॉपर्टी के मालिक नहीं होते,
सिर्फ कुछ कागजातों, कुछ दस्तावेजों पर
अस्थाई रूप से हमारा नाम लिखा होता है।
ईश्वर भी व्यंग्यात्मक रूप से हँसेगा
जब कोई उसे कहेगा कि,
"मैं जमीन के इस टुकड़े का मालिक हूँ "
किसी के बारे में, उसके शानदार कपड़े और बढ़िया कार देखकर, राय कायम मत कीजिए।
हमारे महान गणितज्ञ और वैज्ञानिक व शिक्षक स्कूटर पर ही आया जाया करते थे !
धनवान होना गलत नहीं है ,
बल्कि.. "सिर्फ धनवान होना गलत है"
आइए ज़िंदगी को पकड़ें, इससे पहले कि,
जिंदगी हमें पकड़ ले ।
एक दिन हम सब जुदा हो जाएँगे, तब अपनी बातें, अपने सपने हम बहुत याद करेंगे।
दिन, महीने, साल गुजर जाएँगे, शायद कभी कोई संपर्क भी नहीं रहेगा।
एक रोज हमारी बहुत पुरानी तस्वीर देखकर हमारे बच्चे हमी से पूछेंगे कि,
"तस्वीर में ये दुसरे लोग कौन हैं" ?
तब हम मुस्कुराकर, अपने अदृश्य आँसुओं के साथ बड़े फख्र से कहेंगे---
"ये वो लोग हैं, जिनके साथ मैंने अपने जीवन के बेहतरीन दिन गुजारे हैं। "
दिल्लीवासियों के हित में आप सरकार का फैसला
दिल्लीवासियों के हित में आप सरकार का फिर से बड़ा फैसला
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनता की परेशानी को समझते हुए , फिर से एक बड़ा फैसला ले लिया है।
बरसों से चली आ रही पानी की समस्या पर सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए ,ऐलान किया कि
सरकार मानसून के पानी को इकट्ठा करने के लिए पॉइंट्स बनाएगी।
सभी सरकारी दफ्तरो में रैन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य होंगे ।
सरकार यमुना किनारे छोटे छोटे तालाब बनाएंगी।
पानी के लिए किसानों की जमीन किराये पर लेगी।
इस फैसले से ग्राउंड लेवल पर पानी का स्तर बढेगा ।
दिल्ली में पानी की माँग को पूरा करने के लिए और दिल्ली को पानी की आपूर्ति में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अरविंद केजरीवाल की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है।
इस मॉनसून में टेस्ट करने के लिए यमुना नदी में *प्राकृतिक जल संग्रहण* किया जाएगा।
केजरीवाल ने इसके लिए यमुना की बाढ़ भूमि पर मेगा जल संरक्षण परियोजना को मंजूरी भी दे दी है।
*पानी का भंडारण* करने के लिए यमुना के मैदानों पर *छोटे तालाब* बनाए जाएंगे
केजरीवाल की सरकार *किसानों से किराए पर जमीन* लेगी
किराया तय करने के लिए 5 सरकारी अधिकारियों की एक कमेटी भी बना दी गई है।
सरकार ने अपने सभी सरकारी ईमारतों के लिए भी *वर्षा जल भंडारण* को जरूरी बनाने का फैसला कर लिया।
सभी विभागों को इमारतों में सिस्टम स्थापित करने के लिए निर्देशित किया गया है। साथ ही इन्हें मॉनसून की बारिश से पहले साफ करना और तैयार रखना होगा ताकि बारिश के पानी को सही से इकट्ठा किया जा सके
जहाँ पूरा देश एक भयानक जल संकट की तरफ बढ़ रहा है, ऐसे में ये एक तारीफ वाला कदम है ।
क्योंकि, पानी सबको चाहिए ।
"ग्राउंड वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, बारिश के उस पानी को अगले वर्ष के लिये संचित करेंगे जो युमना में बह कर चला जाता था ।
गरीब की फरियाद
माननीय प्रधानमंत्री जी,
कृपया सारी योजना बंद कर दीजिये।
सिर्फ संसद भवन जैसी कैन्टीन हर दस किलोमीटर पर खुलवा दीजिये ।
सारे लफड़े खत्म।
₹29/- में भरपेट खाना मिलेगा । देश के 80% लोगों का घर चलाने का लफड़ा खत्म।
ना सिलेंडर लाना, ना राशन और घर वाली भी खुश ।
चारों तरफ खुशियाँ ही रहेगी।
फिर हम कहेंगे सबका साथ सबका विकास ।
सबसे बड़ा फायदा ₹1/- किलो गेहूँ नहीं देना पड़ेगा । और प्रधानमंत्री जी को ये ना कहना पड़ेगा कि मिडिल क्लास के लोग अपने हिसाब से घर चलाएँ ।
इस पे गौर करें । शान है या छलावा...।
पूरे भारत में एक ही जगह ऐसी है जहाँ खाने की चीजें सबसे सस्ती है ।
चाय = ₹1.00
सुप = ₹5.50
दाल= ₹1.50
खाना =₹2.00
चपाती =₹1.00
चिकन= ₹24.50
डोसा = ₹4.00
बिरयानी=₹8.00
मच्छी= ₹13.00
ये सब चीजें सिर्फ गरीबों के लिए है और ये सब उपलब्ध है । भारतीय संसद की कैंटीन में।
और उन गरीबों की पगार है । ₹1,50,000/- महीना वो भी आयकर मुक्त ।
यही कारण है कि इन्हें लगता है कि जो आदमी ₹30/- या ₹32/- रोज कमाता है वो गरीब नहीं हैं।
शिक्षित राष्ट्र ही समर्थ राष्ट्र बना सकता है
दिल्ली में रह रहे गरीब परिवार के बच्चों को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फीस सहायता योजना के अंतर्गत न सिर्फ स्कालरशिप मुहैया करा रही है, बल्कि उन बच्चों के सपनों को साकार करने में सहायता कर रही है जो पैसों की कमी के कारण उच्च स्तर की शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
कोई भी छात्र पढ़ाई के लिए लोन लेता है तो सरकार गारेंटी लेगी ।
भविष्य में यही बच्चें एक नया इतिहास लिखेंगे। दिल्ली सरकार का मकसद है की पैसे के अभाव में कोई भी गरीब बच्चा शिक्षा से वंचित ना रह पाये। क्योंकि शिक्षित राष्ट्र ही समर्थ राष्ट्र बना सकता है।
माइकल जैक्सन
माइकल जैक्सन 150, साल जीना चाहता था!
किसी के साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने पहनता था!
लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क लगाता था !
अपनी देखरेख करने के लिए उसने
अपने घर पर 12 डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !
जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की जांच प्रतिदिन किया करते थे!
उसका खाना लैबोरेट्री में चेक होने के बाद उसे खिलाया जाता था!
स्वयं को व्यायाम करवाने के लिए उसने
15 लोगों को रखा हुआ था!
माइकल जैकसन अश्वेत था,
उसने 1987 में प्लास्टिक सर्जरी करवाकर अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था!
अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी छोड़ दिया ।
गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को
किराए पर लिया! और अपने दोस्त भी गोरे बनाए ।
शादी भी गोरी औरतों के साथ की!
नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो से विवाह किया, जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997)
तथा पेरिस माइकल केथरीन (3, अपैल 1998) को जन्म दिया।
वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर चल रहा था!
हमेशा ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था ।
उसने अपने लिए अंगदान करने वाले
डोनर भी तैयार कर रखे थे!
जिन्हें वह खर्चा देता था,
ताकि समय आने पर उसे किडनी, फेफड़े, आंखें या किसी भी शरीर के अन्य अंग की जरूरत पड़ने पर वह आकर दे दें ।
उसको लगता था वह पैसे और अपने रसूख की बदौलत मौत को भी चकमा दे सकता है, लेकिन वह गलत साबित हुआ ।
25 जून 2009 को उसके दिल की धड़कन रुकने लगी,
उसके घर पर 12 डॉक्टरों की मौजूदगी में हालत पर काबू नहीं पाया गया, और
सारे शहर के डाक्टर उसके घर पर जमा हो गए वह भी उसे नहीं बचा पाए।
उसने 25 साल तक डॉक्टर की सलाह के
विपरीत, कुछ नहीं खाया!
अंत समय में उसकी हालत बहुत खराब हो गई थी ।
50 साल तक आते-आते वह पतन के करीब ही पहुंच गया था और 25, जून 2009 को वह इस दुनिया से चला गया !
जिसने अपने लिए डेढ़ सौ साल जीने का
इंतजाम कर रखा था!
उसका इंतजाम धरा का धरा रह गया!
जब उसकी बॉडी का पोस्टमार्टम हुआ तो
डॉक्टर ने बताया कि, उसका शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था!
उसका सिर गंजा था, उसकी पसलियां कंधे हड्डियां टूट चुके थे, उसके शरीर पर अनगिनत सुई के निशान थे, प्लास्टिक सर्जरी के कारण होने वाले दर्द से छुटकारा पाने के लिए एंटीबायोटिक वाले
दर्जनों इंजेक्शन उसे दिन में लेने पड़ते थे!
माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा को
2.5 अरब लोगो ने लाइव देखा था।
यह अब तक की सबसे ज़्यादा
देखे जाने वाली लाइव ब्रॉडकास्ट हैं।
माइकल जैक्सन की मृत्यु के दिन यानी
25 जून 2009 को 3:15 PM पर, सभी सोशल मीडिया के सिस्टम क्रैश हो गए थे।
उसकी मौत की खबर का पता चलते ही
गूगल पर 8 लाख लोगों ने
माइकल जैकसन को सर्च किया!
ज्यादा सर्च होने के कारण गूगल पर
सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम हुआ था! और
गूगल क्रैश हो गया, ढाई घंटे तक गूगल काम नहीं कर पाया!
मौत को चकमा देने की सोचने वाले
हमेशा मौत से चकमा खा ही जाते हैं!
बनावटी दुनिया के बनावटी लोग
कुदरती मौत की बजाय
बनावटी मौत ही मरते हैं!
गंजे सिर पर फिर से उग सकते है बाल
दुनिया भर में इकलौती चीज है जो गंजे सिर पर फिर से उगा सकती बाल - ऐसे करें इस्तेमाल ।
1.कलौंजी ऑयल
2.ऑलिव ऑयल
3.मेहंदी पाउडर
प्रकृति ने संसार में ऐसे अनमोल तोहफे दिए हैं, जिन्हें अपनाकर हम बड़ी-से-बड़ी बीमारियों का जड़ से खात्मा कर सकते हैं। बशर्ते कि हमें उनकी जानकारी हो।
आज आपको बताने जा रहे हैं महिलाओं और पुरुषों की आम समस्या बाल झड़ने के बारे में ।
कलौंजी के इस्तेमाल से आप अपने बालों को मजबूती प्रदान कर सकते हैं और कलौंजी की मदद से नए बाल फिर से वापस पा सकते हैं। कलौंजी में बहुत सारे मिनरल्स और न्यूट्रीएंट्स होते हैं। आयरन, सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर कलौंजी कई प्रकार के रोगों का घर बैठे आसान इलाज है। लगभग 15 एमीनो एसिड वाले कलौंजी शरीर की जरूरी प्रोटीन की कमी को पूरी कर सकता है। हमारे बालों के लिए कलौंजी बहुत ही लाभदायक है।
सिर पर 20 मिनट तक निंबू के रस से मसाज करें और फिर सूख जाने पर बालों को अच्छी तरह से धो लें। इसके बाद कलौंजी का तेल बालों में लगाकर उसे अच्छे से सूखने दें। फिर बाल धो लें। 15 दिनों तक लगातार इस्तेमाल करने से बालों के गिरने की समस्या दूर हो जाती है।
कलौंजी ऑयल, ऑलिव ऑयल, और मेहंदी पाउडर को मिलाकर हल्का गर्म करें. इसे ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसका इस्तेमाल हेयर पैक की तरह करें. सूखने पर बाल अच्छे से धो लें। हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल करने से गंजेपन की समस्या दूर हो जाती है।
कलौंजी की राख को तेल में मिलाकर गंजे लोग अपने सिर पर मालिश करें. कुछ दिनों में ही नए बाल उगने लगेंगे. इस प्रयोग में धैर्य की आवश्यकता है। थोड़ा समय लगता है, लेकिन नए बाल उग आते हैं। गंजेपन की समस्या से छुटकारा मिलता है।
करौंदा
करौंदा (करमदा) पर अभी फलो की बहार हैं ।
करौंदा को संस्कृत में करमर्द, सुखेण, कृष्णापाक फल कहा गया है वही इसे मरवन्दी, करौंदी, करमंदी, करकचा, बाका आदि अलग अलग नामो से जाना जाता है ।
मालवांचल में इसे करमदा कहा जाता हैं।
करौंदा का वृक्ष झाड़दार जाति का होता है उसमें कांटे होते हैं ।
आम घरों में करौंदा सब्जी, चटनी, मुरब्बे और अचार के लिए प्रचलित है ।
जंगलों, खेत खलियानों के आस-पास कँटीली झाडियों के रूप में करौंदा प्रचुरता से उगता हुआ पाया जाता है ।
यह खेत की मेड़ पर लगाने से फसलो को जानवरो से नुकसान नही होता ।
हालाँकि करौंदे के पेड़ पहाडी देशों में ज्यादा होते हैं और कांटे भी होते है ।
यह पौधा भारत में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश ,मध्यप्रदेश और हिमालय के क्षेत्रों में बहुतायत पाया जाता है ।
यह नेपाल और अफ़ग़ानिस्तान में भी पाया जाता है।
इसके दो साल के पौधे में फल आने लगते हैं । और फूल आना फरवरी-मार्च के महीने में शुरू होता है और मई-जून के बीच फल पक जाता है । इसके फूल सफेद होते हैं तथा फूलों की गन्ध जूही के समान होती है।
करौंदे का फल गोल, छोटे कच्चे सफेद लाली युक्त तथा पकने पर और लाल काले पड़ जाते हैं । करोंदा की तासीर गरम होती है।
कच्चे करौंदे का अचार बहुत अच्छा होता है ।
एक विलायती करौंदा भी होता है, जो भारतीय बगीचों में पाया जाता है । इसका फल थोड़ा बड़ा होता है और देखने में सुन्दर भी होता है । इस पर कुछ सुर्खी-सी होती है । आजकल इसी को आचार और चटनी के काम में ज्यादा लिया जाता है।
करोंदा फल के चूर्ण के सेवन से पेट दर्द में आराम मिलता है । करोंदा भूख को बढ़ाता है, पित्त को शांत करता है, प्यास रोकता है और दस्त को बंद करता है । ख़ासकर पैत्तिक दस्तों के लिये तो अत्यन्त ही लाभदायक है।
सूखी खाँसी होने पर करौंदा की पत्तियों के रस का सेवन लाभकरी होता है । गर्मियों में लू लगने और दस्त या डायरिया होने पर इसके फ़लों का जूस तैयार कर पिलाया जाता है, तुरंत आराम मिलता है ।
करोंदा के फल को खाने से मसूढ़ों से खून निकलना ठीक होता है, दाँत भी मजबूत होते हैं ।
करौंदा का प्रयोग एक विशेष विधि द्वारा कर मूंगा व चांदी की भस्म भी बनाई जाती है।
करौंदा को किसान भाई मेंड़ पर लगा सकते है, इस तरह हमें दोहरा फ़ायदा होगा । मेड़ पर करौंदा से आवारा पशुओं से रक्षा होगी साथ ही मेड़ से भी आमदनी होगी ।
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