किसान आखिर गरीब क्यों

धान का कटोरा कहे जाने वाले हमारा छत्तीसगढ़ हो या कृषि प्रधान देश के किसान आखिर गरीब क्यों है ?

एक नजर आंकड़े पर डालेंगे।

खेती करने पर प्रति एकड़ खर्च :--
जुताई....(3 बार ) =  ₹1,500/-
बीज ....              =    ₹750/-
गोबर खाद..        =  ₹1,500/-
रोपाई..               =  ₹3,600/-
उर्वरक...             =  ₹3,000/-
निंदाई गुड़ाई        =  ₹2,000/-
कीटनाशक दवाओं में खर्च + अन्य रख रखाव... = ₹3,500/-
सिंचाई वगैरह में.. = ₹1,000/-
फसल कटाई + मिसाई का खर्च .....             =  ₹2,700/-
सफाई खर्च....     =    ₹500/-
मंडी खर्च....        =    ₹700/-
_____________________
          योग....   =  ₹20,750/-

धान की औसत उत्पादन प्रति एकड़ 17 क्विंटल।

सरकार खरीद रही है..15 क्विं.दर  ₹1,480/- +
₹300/-.बोनस = ₹1,780/- × 15 क्विं. = ₹26,700/- वो बोनस कब मिलेगा भी या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं।

किसान ने धान बेचा ₹26,700/-
खर्च हुआ लगभग  ₹21,000/-

शेष बचा लगभग  ₹7,000/-

अब  ₹7,000/- में घर खर्च देखिए :-- बच्चों की पढ़ाई लिखाई , हल्की फुल्की स्वास्थ्य खराब होने पर दवाई , साल भर के कपड़ों का खर्च , बिजली का बिल , साक शब्जी का खर्च आदि मिला कर महीने में ₹3,500/- तो होते ही हैं , तो 12 महीने का ₹40 - 42 हजार होता है।

किसान की साल भर की कमाई का बचत ₹7 से ₹10 हजार मान लें और खर्च ₹40-42 हजार न मानकर ₹30 हजार रुपये भी मानते हैं तो भी किसान हर वर्ष ₹20 से 25 हजार नुकसान उठाकर जी रहा है।

अंत में कर्जदार बनकर या तो जमीन बेचेंगे या फिर आत्महत्या करने मजबूर होंगे।

अब कर्मचारियों को देखो आठ घंटे ड्यूटी और कमाई औसतन ₹45 हजार रुपये और लागत खर्च एक रुपये भी नहीं ।
नेताओं का देख लो, लाख रुपये वेतन, फ्री बिजली, फ्री यात्रा, फ्री डीजल पेट्रोल, लागत कुछ भी नहीं और पांच साल के कार्यकाल में संपत्ति पांच से दस गुनी। इसके उपरांत आजीवन पेंशन।

दिन रात जी तोड़ मेहनत करने वाला किसान दिनोंदिन कमजोर होता जा रहा है, और
ये नेता लोग जोंक की तरह चिपककर किसानों का खून चूस रहे हैं ।

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