दिल्ली में जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो दिल्ली का कुल बजट था ₹32000/= करोड रुपए|
जब टैक्स लगाने की बारी आई तो आम आदमी पार्टी सरकार ने सभी चीजों पर टैक्स या तो पुराना चालू रखा या तो कम किया|
किसी भी वस्तु पर टैक्स बढ़ाया नहीं गया|
कुछेक वस्तुओं पर तो टैक्स 12% से घटाकर सीधा 5% तक कर दिया गया|
पिछले 2 साल में जितने भी बजट आए उन सभी बजट में एक भी बजट ऐसा नहीं था जिसमें केजरीवाल सरकार ने टैक्स की दरें बढ़ाई हो|
टैक्स कम करने के बावजूद आज केजरीवाल सरकार का बजट ₹32000/= करोड़ से कहीं बढ़कर ₹48000/= करोड़ रुपए पहुंच गया है|
यह कमाल है अरविंद केजरीवाल की अद्भुत अर्थव्यवस्था की समझ का।
आज तक की सरकारें अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए जनता पर टैक्स का बोझ लाद कर, जनता को चूस चूस कर खुद मोटा होने का प्लान करते आई है।
देश की लगभग सभी सरकारे इसी फार्मूला को मानती है कि अगर आमदनी बढ़ानी है तो जनता पर टैक्स बढ़ाना पड़ेगा।
लेकिन केजरीवाल इकनॉमिक्स इस से बिल्कुल उल्टा कहता है।
जब जनता पर टैक्स बढ़ाया जाता है तो जनता टैक्स की चोरी करने लगती है नतीजन टैक्स का कलेक्शन उल्टा कम हो जाता है।
लेकिन अगर जनता पर टैक्स का बोझ कम कर दिया जाता है तो ज्यादा से ज्यादा लोग टैक्स देने लगते हैं और यह टैक्स देना उनके लिए कोई बड़ी बात भी नहीं रह जाती इसलिए टैक्स चोरी रुक जाती है।
यह कोई किताबी थियोरी नहीं है केजरीवाल इकनॉमिक्स एक आजमाया गया हुआ सच है जो कि आप दिल्ली में देख रहे हैं।
जब टैक्स लगाने की बारी आई तो आम आदमी पार्टी सरकार ने सभी चीजों पर टैक्स या तो पुराना चालू रखा या तो कम किया|
किसी भी वस्तु पर टैक्स बढ़ाया नहीं गया|
कुछेक वस्तुओं पर तो टैक्स 12% से घटाकर सीधा 5% तक कर दिया गया|
पिछले 2 साल में जितने भी बजट आए उन सभी बजट में एक भी बजट ऐसा नहीं था जिसमें केजरीवाल सरकार ने टैक्स की दरें बढ़ाई हो|
टैक्स कम करने के बावजूद आज केजरीवाल सरकार का बजट ₹32000/= करोड़ से कहीं बढ़कर ₹48000/= करोड़ रुपए पहुंच गया है|
यह कमाल है अरविंद केजरीवाल की अद्भुत अर्थव्यवस्था की समझ का।
आज तक की सरकारें अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए जनता पर टैक्स का बोझ लाद कर, जनता को चूस चूस कर खुद मोटा होने का प्लान करते आई है।
देश की लगभग सभी सरकारे इसी फार्मूला को मानती है कि अगर आमदनी बढ़ानी है तो जनता पर टैक्स बढ़ाना पड़ेगा।
लेकिन केजरीवाल इकनॉमिक्स इस से बिल्कुल उल्टा कहता है।
जब जनता पर टैक्स बढ़ाया जाता है तो जनता टैक्स की चोरी करने लगती है नतीजन टैक्स का कलेक्शन उल्टा कम हो जाता है।
लेकिन अगर जनता पर टैक्स का बोझ कम कर दिया जाता है तो ज्यादा से ज्यादा लोग टैक्स देने लगते हैं और यह टैक्स देना उनके लिए कोई बड़ी बात भी नहीं रह जाती इसलिए टैक्स चोरी रुक जाती है।
यह कोई किताबी थियोरी नहीं है केजरीवाल इकनॉमिक्स एक आजमाया गया हुआ सच है जो कि आप दिल्ली में देख रहे हैं।


































